भारतीय हॉकी टीम (Hockey Team) की नई भगवा जर्सी (Saffron Jersy) को लेकर शुरू हुई बहस के बीच हॉकी इंडिया ने बड़ा बयान जारी किया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला किसी अन्य वजह से नहीं, बल्कि मैदान पर खिलाड़ियों की बेहतर दृश्यता और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए लिया गया है।
हॉकी इंडिया ने कहा कि खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने महसूस किया कि नीले रंग की पारंपरिक जर्सी नीले टर्फ पर कई बार खिलाड़ियों को पहचानने में परेशानी पैदा करती थी। इसी वजह से अलग रंग की जर्सी पर विचार किया गया और आखिरकार केसरिया रंग चुना गया।
संस्था के अनुसार केसरिया रंग भारतीय ध्वज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो साहस, बलिदान और गौरव का प्रतीक माना जाता है। हॉकी इंडिया ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय टीम की किट में पहले भी समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं।
विरेन रास्किन्हा ने जताई आपत्ति
नई जर्सी को लेकर पूर्व भारतीय कप्तान विरेन रास्किन्हा ने असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान वर्षों से नीले रंग से रही है और इसे बदलना टीम की विरासत से जुड़ा बड़ा बदलाव है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रशंसक भारतीय टीम को नीली जर्सी में देखने के आदी हैं और नए रंग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विश्व कप में पहली बार भगवा किट में खेलेगी टीम
नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय पुरुष और महिला टीमें नई केसरिया किट पहनकर मैदान में उतरेंगी। जहां हॉकी इंडिया इसे तकनीकी फैसला बता रहा है, वहीं खेल जगत में इसे लेकर चर्चा जारी है।