5 लाख रूपये देकर पति ने लगवाई पत्नी की नौकरी, साथ रहने से किया इन्कार, अर्जी दाखिल

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उत्तर प्रदेश। आज हमारे सामने एक ऐसे पति की खबर सामने आई। जो खुद बेरोजगार होकर भी अपनी पत्नी की नौकरी के लिए 5 लाख रूपये खर्च किये। दरअसल, बरेली के बिशारतगंज गांव बलेई भगवंतपुर में रहने वाले 25 वर्षीय योगेश कुमार ने बताया कि उसकी शादी तीन जून, 2015 को हुई थी। शादी के बाद उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी तुनकमिजाज है।

कुछ दिन बाद ही वह छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर अपने मायके जाने लगी। हालांकि फिर भी वह उसके साथ निबाह करते रहे। इसी दौरान उनके ससुर यशवीर सिंह ने उससे कहा कि अगर वह पांच लाख रुपये खर्च करें तो वह उनकी पत्नी की सरकारी नौकरी लगवा सकते हैं।

उन्होंने रिश्तेदारों से उधार लेकर यह रकम ससुर को दे दी। 31 मई 2016 को उनकी पत्नी को वन विभाग में नौकरी मिल गई और अब वह डीएफओ बरेली के कार्यालय में तैनात है। योगेश का कहना है कि सरकारी नौकरी लगते ही उनकी पत्नी का उसके साथ रहा-सहा लगाव भी खत्म हो गया।

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एक दिन उनकी गैरमौजूदगी में उसने उनके घर आकर तीन लाख के जेवर और पांच हजार का कैश निकाला और वापस चली गई। काफी समझाने के बाद भी फिर उनके घर नहीं लौटी। वह कई बार उसे बुलाने गया लेकिन उसने उनके साथ रहने से इनकार कर दिया।

उन्होंने अदालत में मुकदमा भी दायर किया मगर फिर भी वह उनके साथ रहने को तैयार नहीं हुई। योगेश ने कहा कि उनकी पत्नी सरकारी नौकर है। उसे 28 हजार रुपये वेतन मिल रहा है जबकि वह बेरोजगार हैं।

हालांकि योगेश ने अपने वकील के जरिये सोमवार को अदालत में अर्जी दाखिल की। इस अर्जी में उसने कहा है कि वह खुद भी पढ़ा लिखा बेरोजगार है, फिर भी उसने अपनी पत्नी की सरकारी नौकरी लगवाने के लिए पांच लाख रुपये खर्च किए थे।

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उसने अदालत से फरियाद की है कि उसकी बेरोजगारी का ख्याल रखते हुए उसे उसकी पत्नी से गुजारा भत्ता दिलाया जाए। लिहाजा उनकी पत्नी पर उनका 14 हजार रुपये महीने के गुजारा भत्ते का दावा बनता है जो वह आसानी से उन्हें दे सकती है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के मुताबिक कोई भी पक्षकार, वह चाहे पति हो या पत्नी, एक-दूसरे से गुजारा भत्ता की मांग कर सकते हैं। अदालत इस मामले में अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करके ऐसा आदेश भी कर सकती है। इस मामले में आर्थिक स्थिति के अलावा पक्षकारों का रवैया भी अहमियत रखता है। हालात बदलने पर आदेश में परिवर्तन भी किया जा सकता है।

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