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अगर मुझे बुलेट ट्रेन और रिक्शा में एक चुनना होगा तो मैं रिक्शा चुनूंगा : उद्धव ठाकरे

 

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विपक्ष को सरकार गिराने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि जिस किसी को उनकी सरकार गिरानी हो वो आज ही ऐसा कर सकते है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि उनकी सरकार तीन पहियों की रिक्शा है। और ये वो गरीबों का है जिसकी स्टेयरिंग उनके हाथों मे है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह बातें शिव सेना के मुखपत्र सामना को दिए एक इंटरव्यू में कही है। ठाकरे का 27 जुलाई को जन्मदिन है। वे कल 60 साल के हो जाएंगे। इसी मौके पर उन्होंने संजय राउत से बातचीत की है।

सरकार का भविष्य विपक्ष के नेता पर निर्भर नहीं है

ठाकरे से जब पूछा गया कि विपक्ष की तरफ से बार-बार कहा जा रहा है कि महराष्ट्र में उनकी सरकार 3 पहियों की है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘केंद्र में कितने पहिये हैं? हमारी तो ये तीन पार्टियों की सरकार है। केंद्र में कितने दलों की सरकार है, बताओ ना! पिछली बार जब मैं एनडीए की मीटिंग में गया था, तब तो 30-35 पहिए थे। मतलब रेलगाड़ी थी। इस सरकार का भविष्य विपक्ष के नेता पर निर्भर नहीं है। इसलिए मैं कहता हूं कि सरकार गिराना होगा तो अवश्य गिराओ। अभी गिराओ।

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बीजेपी का ऑपरेशन लोटस होगा फेल

ठाकरे ने ये भी कहा कि बीजेपी का ऑपरेशन लोटस महाराष्ट्र में सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि करके देखो न। मैं तो यहां बैठा ही हूं। कुछ लोग कहते हैं कि अगस्त-सितंबर में सरकार गिराएंगे। मेरा कहना है कि इंतजार किस बात का करते हो, अभी गिराओ। मेरा साक्षात्कार चलने के दौरान सरकार गिराओ। मैं क्या फेविकॉल लगाकर नहीं बैठा हूं? गिराना होगा तो गिराओ। अवश्य गिराओ। आप को गिराने-पटकने में आनंद मिलता है न। कुछ लोगों को बनाने में आनंद मिलता है। कुछ लोगों को बिगाड़ने में आनंद मिलता है। बिगाड़ने में होगा तो बिगाड़ो। मुझे परवाह नहीं है। गिराओ सरकार।

ठाकरे ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र में सरकार एक जुट है

ठाकरे ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र में सरकार एक जुट है। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि शरद पवार और सोनिया गांधी से लगातार बातचीत होती रहती है। उन्होंने कहा कि पवार साहब से भी मेरी अच्छी बातचीत होती है। एकदम नियमित तौर पर तो नहीं लेकिन बीच-बीच में मैं सोनिया जी को भी फोन करता रहता हूं।

पवार साहब के साथ मुलाकात एक अलग ही अनुभव होता है। वे मिलते हैं तब कुछ काम लेकर आते हैं ऐसा बिल्कुल नहीं है। कभी-कभी उनका फोन आता है कि कल क्या कर रहे हो? और ज्यादातर समय सब तालमेल बैठता होगा तो उनकी और मेरी मुलाकात होती है। मुलाकात में वे अपने पुराने अनुभव बताते रहते हैं।

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