जेल में हो रही इफ्तार पार्टी, हिन्दू कैदी भी रख रहे हैं रोजा

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हरदोई। हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई का पर्याय बना एक जेल। यूपी के हरदोई की जेल की काल कोठरी में कुरान की आयतें गूंज रही हैं। बताया जा रहा है कि जिला कारागार में बंद 170 बंदियों ने यहां रोजा रखा है। जिसमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। कारागार में सभी रोजेदारों के लिए नमाज के साथ ही रोजा इफ्तार पार्टी और सहरी का खास इंतजाम किया गया है। जेल प्रशासन के मुताबिक कारागार की दीवारें गंगा-जमुनी तहजीब पेश कर रही हैं। साथ ही कारागार में बंद सभी हिन्दू कैदी, रोजेदारों की मदद करते हैं। इसी तरह तिहाड़ जेल में भी इस साल 59 हिंदू कैदी अपने 2299 मुस्लिम कैदी साथियों के साथ रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा रख रहे हैं।

जेल में महिलाएं भी रहती हैं रोजा

हरदोई के जेल में बंद सैकड़ों बंदी जिला कारागार में सजा काट रहे हैं। इस सजा के बीच ऐसे भी बंदी हैं जोकि ईश्वर-अल्लाह को याद करते रहते हैं। बताया जा रहा है कि सिर्फ रमज़ान ही नहीं बल्कि नवरात्र में भी कैदी व्रत रखते हैं। जेलर मृत्युंजय कुमार पांडेय के अनुसार जेल में 170 कैदियों ने रोजा रखा है। जिसमें सात महिलाएं भी रोजा रखे हुए हैं। कारागार प्रशासन ने उनकी इफ्तार और सहरी का इंतजाम करा रखा है। समाज सेवी संस्थाएं भी मदद करती हैं।

जेलर कहते हैं कि सहरी के लिए बंदियों को शाम को ही पूरा नाश्ता दे दिया जाता है। वहीं इफ्तार के लिए खजूर के साथ ही डेढ़ खुराक खाना दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वैसे हर साल कई हिन्दू बंदी भी रोजा रखते हैं और रोजेदारों की पूरी मदद भी करते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रमजान में कारागार में रोजेदारों के लिए किए गए खास इंतजाम में जेल प्रशासन ने एक बैरक को नमाज के लिए सुरक्षित कर दिया है।

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तिहाड़ में भी रख रहे रोजा

देश के सबसे बड़े कारागार तिहाड़ जेल में भी इस साल 59 हिंदू कैदी अपने 2299 मुस्लिम कैदी साथियों के साथ रमज़ान के पवित्र महीने में रोज़ा रख रहे हैं। लेकिन इन सभी के रोज़ा रखने के सभी के अपने अलग-अलग कारण हैं। कोई इसलिए रोज़ा रख रहा है ताकि उसे समय से पहले रिहाई मिल जाए तो कोई अपने बच्चों व घर वालों की सलामती के लिए। कुछ कैदी ऐसे भी हैं जो अपने साथी कैदियों का साथ देने के लिए रोज़ा रख रहे हैं।

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