योगीराज में विधायक व सांसद खुलेआम ले रहें हैं 20 -25 फीसदी कमीशन

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बांदा। यूपी में बांदा जिले के भाजपा विधायक पेयजल संकट दूर करने के अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। इसी बीच जल निगम के अधीक्षण अभियंता एमसी श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि सरकारी सेवा में पहली बार ऐसे जन प्रतिनिधि देखे हैं। अगर हम भ्रष्ट हैं तो उन्हें जांच करानी चाहिए। इस तरह सरेआम बेइज्जत नहीं करना चाहिए। उन्होंने सामूहिक तौर पर सभी विधायकों और सांसदों पर आरोप भी लगाया कि विधायक व सांसद निधि हो या बुंदेलखंड विकास निधि से खुलेआम 20-25 फीसदी कमीशन लेते हैं। जिसकी हकीकत निधियों से करवाए गए कार्यों के भौतिक सत्यापन से उजागर हो रही है।

बांदा में विधायकों ने लगाये भ्रष्टाचार के आरोप, कानून का बनाया मखौल

बीते दिनों बांदा सदर के विधायक ने टैंकर प्रभारी को मुर्गा बनाकर सरेआम बेइज्जत किया था। इसके बाद बीते मंगलवार को तिंदवारी के विधायक बृजेश प्रजापति ने जल निगम के अधीक्षण अभियंता को नोटों की माला पहना कर उन पर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जल संस्थान महाप्रबंधक के कार्यालय पर ताला भी जड़ दिया।

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विधायक की हरकत को बताया गैर जिम्मेदाराना: कमिश्नर रामविशाल मिश्र

कमिश्नर रामविशाल मिश्र ने जनप्रतिनिधियों की इस हरकत को गैर जिम्मेदाराना माना है। बुधवार को उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को इस तरह बेइज्जत करने का अधिकार नहीं है। उन्हें मर्यादित आचरण अपनाना चाहिए।

जल निगम और जल संस्थान पेयजल संकट के प्रति संवेदनशून्य:विधायक

विधायक बृजेश प्रजापति ने बुधवार को फिर दोहराया कि जल निगम और जल संस्थान पेयजल संकट के प्रति संवेदनशून्य हैं और सिर्फ कमीशनखोरी पर उतारू हैं। इस घटना के कुछ दिन पूर्व बांदा   सदर के विधायक प्रकाश द्विवेदी ने जल संस्थान के टैंकर प्रभारी नरेन्द्र कुमार को सरेआम मुर्गा बनाने के बाद बेहोश होने तक उठक-बैठक लगवा चुके हैं। प्रजापति ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में जल निगम द्वारा लगवाए गए हैंडपंप मानक के विपरीत हैं। जिनमें पुरानी पाइपों का इस्तेमाल किया गया है। विधायक निधि से लगे हैंडपंपों में जल निगम के अधिकारियों ने घोर कमीशनबाजी की है। इसलिए पेयजल संकट से उबरने के बहाने अधिकारी घटिया काम न करें और बतौर रिश्वत अधीक्षण अभियंता यह रकम अपने पास रख लें। उन्होंने जल निगम कार्यालय से सटे जल संस्थान के महाप्रबंधक कार्यालय में उनके गैर हाजिर रहने पर ताला जड़ दिया और चाबी कमिश्नर को सौंप दी।

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