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CJP फाउंडर अभिजीत दिपके पर स्याही फेंकी, आरोपी महिला पुलिस हिरासत में

Abhijeet Dipke

Abhijeet Dipke

जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन स्थल पर शनिवार को एक बेहद अप्रत्याशित और सनसनीखेज घटना सामने आई है। परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) पर एक अज्ञात महिला ने अचानक स्याही फेंक (Ink Attack) दी। यह घटना उस समय घटित हुई जब वह मंच से एक बड़ी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। स्याही फेंकने की इस अप्रत्याशित हरकत के तुरंत बाद वहां मौजूद समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया और वे मंच की ओर दौड़ पड़े, जिससे कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए गंभीर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और भाषण को बीच में ही रोकना पड़ा। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया, हालांकि प्राथमिक पूछताछ में अभी तक हमलावर महिला की वास्तविक पहचान और इस घटना के पीछे के मुख्य कारणों का विधिक रूप से पता नहीं चल सका है।

राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी घटनाक्रम की टाइमिंग को बेहद संवेदनशील मान रहे हैं, क्योंकि अभिजीत दिपके पर यह हमला सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर से जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) ले जाए जाने के ठीक कुछ घंटों बाद ही हुआ है। गौरतलब है कि नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक प्रशासनिक व तकनीकी सुधारों की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे, जिसके कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। डॉक्टरों द्वारा आंतरिक अंगों के प्रभावित होने की गंभीर चेतावनी जारी किए जाने के बाद, शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी अवधि में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें धरना स्थल से हटाकर अस्पताल में विधिक रूप से भर्ती करा दिया था।

सोनम वांगचुक को धरना स्थल से उस समय हटाया गया जब उनके द्वारा प्रस्तावित ऐतिहासिक ‘संसद मार्च’ में महज 48 घंटे से भी कम का समय शेष रह गया था। कॉकरोच जनता पार्टी और सोनम वांगचुक के संयुक्त आह्वान पर आगामी सोमवार को देश की संसद के मॉनसून सत्र के ठीक पहले दिन जंतर-मंतर से संसद भवन तक एक बहुत बड़े शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आयोजन तय किया गया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस लोकतांत्रिक मार्च को असफल करने और छात्रों की आवाज को दबाने के उद्देश्य से ही जानबूझकर यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इस बड़ी कार्रवाई के ठीक बाद मंच पर पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके पर हुए इस स्याही हमले ने आंदोलन की आग को और अधिक भड़का दिया है, जिससे मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी विधिक चुनौती साबित होने वाला है।

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