अयोध्या मामले की संविधान पीठ से क्यों हटे जस्टिस यूयू ललित, जानें पूरी बात

जस्टिस यूयू ललित, अयोध्याज मामले की संविधान पीठ से क्यों हटे, जाने पूरी बात
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नई दिल्‍ली। बाबरी मस्जिद के मामले की सुनवाई के लिए बनी संविधान पीठ से जस्टिस यूयू ललित ने खुद को अलग इस लिए कर लिया है क्यों की दूसरे पक्ष के वकील ने ललित पर यह कहकर आपत्ति जताई थी कि वह पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कल्याण सिंह के मुक़दमे की सुनवाई के दौरान बतौर वकील एक पक्ष की तरफ से पेश हुए थे। जिसकी वजह से खुद जस्टिस ललित ने भी इस पीठ से हटने की अपील की थी, जिसे स्‍वीकृति भी मिल गई है। इस मामले में अब पांचवें जज का नाम तय होने के बाद सुनवाई पर कोर्ट फैसला लेगी। जस्टिस ललित की जहां तक बात करें तो वह सुप्रीम कोर्ट के ऐसे छठे वरिष्‍ठ वकील हैं जिन्‍हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल अभी 8 नवंबर 2022 तक बाक़ी है।

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दिल्‍ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज, जस्टिस ललित के पिता रहे हैं। जिसके बाद उन्‍होंने सीनियर काउंसिल के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की थी। 1986 में सुप्रीम कोर्ट में ही ललित ने अपनी प्रेक्टिस शुरू की थी। जस्टिस ललित कई हाई-प्रोफाइल मामलों में भी कोर्ट के समक्ष पेश हो चूके हैं। जैसे बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का काला हिरण का शिकार मामला, करप्‍शन मामले में फंसे कैप्‍टन अमरिंदर सिंह, सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह की तरफ से और जन्‍मतिथी मामले में फंसे पूर्व आर्मी जनरल वीके सिंह की तरफ से भी पेश हुए थे।

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बीते 26 साल 1 माह पूर्व 6 दिसंबर 1992 को उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने जुलाई 1992 में सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दिया था, कि बाबरी मस्जिद के ढांचे को जैसा के तैसा रखा जाएगा। लेकिन उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को पूरी बाबरी मस्जिद को ही ढहा दिया था। जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को कल्याण सिंह ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। लेकिन दूसरे दिन केंद्र सरकार ने यूपी की भाजपा सरकार को ही बर्खास्त कर दिया था। अदालत के निर्देशन को ना मानने पर कल्याण सिंह को 24 अक्टूबर 1994 को सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई थी। इसी मामले में जस्सिट यूयू ललित कल्याण सिंह की पैरवी करने के लिए पेश हुए थे। जिसके बाद लिब्राहन आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी नरसिम्हा राव को क्लीन चिट दी गई थी। लेकिन योजनाबद्ध, सत्ता का दुरुपयोग, समर्थन के लिए युवाओं को आकर्षित करने, और आरएसएस का राज्य सरकार में सीधे दखल के लिए मुख्यमंत्री कल्याण और उनकी सरकार की आलोचना की गई। जिसको ले कर कल्याण सिंह सहित उनके कई नेताओं के खिलाफ सीबीआई ने मुकदमा भी दर्ज किया था।

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