कल्पेश याज्ञिक की मृत्यु हार्ट अटैक नहीं छत से गिरने पर हुई : मध्य प्रदेश पुलिस

कल्पेश याज्ञिक
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भोपाल। देश के बड़े अखबार के समूह संपादक कल्पेश याज्ञिक की गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात को मौत हो गई। इसकी वजह प्रारंभिक तौर पर हृदय गति रुक जाना बताया गया, जबकि अब जो तथ्य सामने आ रहे है, वे कुछ और ही कहानी कह रहे हैं।

आखिर कल्पेश की मौत पर पर्दा डालने की आखिर क्यों हो रही हैं कोशिशें ?

यह सवाल लगातार पत्रकारिता जगत में हिलोरें मार रहा है। बतातें चलें कि कल्पेश याज्ञिक एक जिंदादिल इंसान थे, मगर बीते कुछ अरसे से वह उलझन के दौर से गुजर रहे थे यह उन्हें नजदीक से जानने वाले मानते हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने अपनी फेसबुक वॉल पर भी लिखा है कि हाल के दिनों में उसके फोन कम आ रहे थे। बीते दिनों मैंने कहा, कैसा चल रहा है कल्पेश? बोला, उलझ गया हूं। रूटीन काम इतना अधिक है कि अपने लिए टाइम ही नहीं मिलता। एकाध किताब लिखना चाहता हूं। देखिए। कब समय मिलता है।

ये भी पढ़ें :-वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक का दिल का दौरा पड़ने से निधन 

कल्पेश की आखिर क्या उलझन थी?

कल्पेश याज्ञिक की आखिर क्या उलझन थी? यह समझना आम आदमी के लिए आसान नहीं है, मगर पत्रकारिता जगत के लोग इसे आसानी से समझ सकते है, बड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ दबाव भी बढ़ जाता है। उनकी गुरुवार की देर रात को जब निधन की खबर आई तो हर तरफ यही बताया गया कि इंदौर के दफ्तर में काम करते वक्त उन्हें हार्ट अटैक आया और बॉम्बे अस्पताल ले जाया गया, ऑपरेशन के दौरान दोबारा अटैक आया और रात दो बजे निधन हो गया।

कल्पेश की मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि छत से गिरने से हुई है: डीआईजी

अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वह इस बात का खुलासा कर रहे है कि कल्पेश याज्ञिक की मौत हार्ट अटैक से नहीं बल्कि छत से गिरने से हुई है। इंदौर के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरि नारायण चारी मिश्रा ने शनिवार को बताया कि कल्पेश की मौत छत से गिरने से हुई है, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

सवाल है कि कल्पेश आखिर तीसरी मंजिल की छत पर गए क्यों थे?

साप्ताहिक कॉलम ‘असंभव के विरुद्घ’ लिखने वाला कल्पेश याज्ञिक आखिर कैसे हार गए। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। पुलिस की जांच पर ही इस मामले की हकीकत का दारोमदार छिपा हुआ है। सवाल है कि कल्पेश आखिर तीसरी मंजिल की छत पर गए क्यों थे? क्या उनकी आत्महत्या की कोई योजना थी, अथवा हादसे का शिकार हुए हैं। सवाल यह भी हैं कि कल्पेश छत पर अकेले गए थे या कोई उनके साथ था? अगर उन्होंने खुद कूदकर आत्महत्या की है तो ऐसी क्या बात थी, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया?

वह न तो किसी तरह का नशा करते थे और न ही गलत आदतों के थे आदी

उनको नजदीक से जानने वालों को पता है कि वह न तो किसी तरह का नशा करते थे और न ही गलत आदतों के आदी थे। बीते दिनों एक ऑडियो के वायरल होने की चर्चा जरूर आई थी जिसमें कथित तौर पर उनकी एक लड़की से बातचीत है। आमतौर पर सभी अखबारों के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं, उनके जरिए भी बहुत कुछ उजागर हो सकता है। इन कैमरों से यह आसानी से पता चल जाएगा कि वे सीढ़ियों के सहारे छत पर गए थे या लिफ्ट का सहारा लेकर, क्योंकि कल्पेश दफ्तर की दूसरी मंजिल पर बैठते थे, यहीं उनका चैंबर था।

 

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