केजीएमयू की जूनियर डॉक्‍टर ने तोड़ा दम, सीनियर पर मुकदमा दर्ज

- in क्राइम, लखनऊ

लखनऊ। केजीएमयू की जूनियर डॉक्टर (जेआर थर्ड) मनीषा शर्मा ने सोमवार को दोपहर करीब डेढ़ बजे इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह केजीएमयू के क्वीन मेरी अस्पताल में एमएस अंतिम वर्ष की छात्रा थी। शनिवार को रात करीब आठ बजे बुद्धा हास्टल में उसने बेहोशी में दिए जाने वाले इंजेक्शन वेक्यूरेनियम की हाईडोज लगा ली थी। उसे ट्रामा सेंटर की वेंटीलेटर यूनिट में भर्ती किया गया था, जहां उसकी सांसें थम गईं। उसकी बड़ी बहन दीपा शर्मा की ओर से यूरो सर्जरी विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. उधम सिंह पर प्रताडि़त करने व आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज करवाया गया है।  बताते चलें कि मनीषा का नाम व्यापमं घोटाले में आया था। जमानत के बाद उसने कोर्ट के आदेश पर केजीएमयू में एमएस कोर्स में 2015 में दाखिला लिया था।

दरअसल, 638 शिवनगर, मसवानपुर कानपुर निवासी रमेश चंद्र विद्यार्थी की सबसे छोटी बेटी डॉ. मनीषा शर्मा केजीएमयू के क्वीनमेरी अस्पताल में एमएस की छात्रा थी। साथ ही वह जूनियर रेजीडेंट भी थी। शनिवार की रात करीब आठ बजे मनीषा ने बुद्धा हॉस्टल में अपने कमरे में इंजेक्शन की हाई डोज लगा लगा ली थी। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मनीषा की सोमवार दोपहर करीब 2:00 मौत हो गई। वहीं, बड़ी बहन दीपा शर्मा यूरो सर्जरी विभाग के सीनियर रेजीडेंट डॉ. उधम सिंह पर आरोप लगा रही थी कि उसी की वजह से मेरी बहन की मौत हो गई। कहा, कि इसी सीनियर ने मुझे फोन करके बताया था कि मनीषा से मेरी कहासुनी हुई है। इसके बाद उसने यह कदम उठा लिया। मेरे पास मोबाइल फोन पर इसकी कॉल रिकार्ड है। डॉ. उधम सिंह के खिलाफ वजीरगंज थाने में उसके लिए आत्महत्या के लिए प्रेरित करने और उत्पीडऩ का मुकदमा भी दर्ज करवाया है।

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वहीं, मौत की खबर से उसकी मां गीता का रो-रो कर बुरा हाल है। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी मनीषा ही डॉक्टर बनी थी, वह एमएस कोर्स की छात्रा थी। बहन ने बताया कि मंगलवार से उसके इम्तिहान होने थे। इसके बाद वो एमएस की डिग्री पाकर सीनियर रेजीडेंट बन जाती। जानकारी के मुताबिक, मनीषा ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। केजीएमयू में पीजी कोर्स में उसका दाखिला हुआ था। छह महीना देर से दाखिला लेने के कारण उसका इंतिहान अब लिया जा रहा था। डॉ उधम सिंह जोकि यूरोलॉजी सर्जरी में सीनियर रेजीडेंट है वह उसी की सहपाठी था। मनीषा का इम्तिहान अब छह महीना बाद होना था, ऐसे में डॉ उधम सिंह सीनियर रेजीडेंट हो गया था। केजीएमयू प्रशासन ने बताया कि डॉ. मनीषा शर्मा बुद्धा हास्टल के कमरा नंबर 309 में रहती थी। उसका कमरा सील कर दिया गया है। मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया है।

अब उसे पुलिस टीम की निगरानी में ही खोला जाएगा। 2015 में केजीएमयू में क्वीन मेरी अस्पताल में पीजी कोर्स के दाखिले के समय डॉक्टर मनीषा का नाम व्यापम घोटाले में आया था। मनीषा के पिता ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर छह महीने बाद मनीषा को दाखिला मिला था, अभी मामला कोर्ट में चल रहा है। उधर, केजीएमयू प्रशासन का कहना है मनीषा से व्यापम घोटाले मैं पूछताछ के लिए पुलिस ले गई थी।  वहीं, इंस्पेक्टर वजीरगंज पंकज सिंह का कहना है कि मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। जल्द डॉक्टर उधम सिंह से भी पूछताछ होगी।

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