खुर्शीद ने पार्टी के नेताओं के नाम लिखी पोस्ट में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने की पैरवी की

सलमान खुर्शीद
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नई दिल्ली। पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद अपनी ही पार्टी के नेताओं पर जमकर बरसे हैं। उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखकर उन नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई है, जिन्होंने इसी हफ्ते राहुल गांधी पर खुर्शीद के बयान को लेकर उन्हें हिदायत दी थी। खुर्शीद ने अपनी ही पार्टी के नेताओं के नाम लिखी पोस्ट में राहुल गांधी के दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनने की भी पैरवी की।

खुर्शीद ने इसी हफ्ते कहा था कि राहुल गांधी के ‘छोड़ जाने’ के कारण पार्टी लोकसभा चुनावों में हार के कारणों पर गंभीर चर्चा भी नहीं कर पाई थी। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने को खुर्शीद द्वारा ‘छोड़ जाना’ बताने पर हिदायत दी थी कि लोगों को इस तरह की टिप्पणियां करने की जगह बीजेपी सरकार की गलतियां उजागर करनी चाहिए।

खुर्शीद ने अपनी टिप्पणी पर हुए विवाद को लेकर बड़ी सी पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने कहा, ‘व्यक्तिगत विश्वासपात्रता या सियासी रणनीति के बारे में जिन्हें कुछ नहीं पता है, वे मुझे ज्ञान देते हैं तो हैरानी होती है। इसलिए, मैं एक बार उनको बता देना चाहता हूं कि मैं विश्वास और निष्ठा को भरोसा और व्यक्तिगत पसंद मानता हूं। वास्तविक या काल्पनिक भय और मतभेद से निकलकर आगे बढ़ने का समय है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं व्यक्तिगत कृतज्ञता और इतिहास तथा भारतीय लोकतंत्र की समझ के कारण गांधी परिवार का समर्थन करता हूं।’ कांग्रेस में अपने साथियों और ‘सुनने वालों’ को लिखे पत्र के रूप में की गई इस पोस्ट में खुर्शीद ने कहा कि गंभीर क्षणों में रणनीतिक चुप्पी में समझदारी होती है, लेकिन साथ-साथ बोलना भी सामूहिक भविष्य के लिए जरूरी होता है।

खुर्शीद ने कहा कि सिर्फ मृत मछलियां हीं पानी के बहाव के साथ बहती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बीजेपी की तरह नहीं है और न उसे कभी होना चाहिए। उन्होंने लिखा, ‘जब हमारे प्रवक्ता बीजेपी को काउंटर करने के हमारे दायित्वों की तरफ इशारा करते हैं तो उन्हें यह जरूर याद रखना चाहिए कि यह तभी संभव है जब हम बहुआयामी वैश्विक नजरिए और भयहीन अभिव्यक्ति का इजहार करेंगे।’

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, ‘आरएसएस के खिलाफ हमारा संघर्ष सिर्फ चीख-चिल्लाहट भरे मुहावरों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि हमें यह भी तय करना होगा कि टकराव समेत खास परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रिया कैसी हो।’ उन्होंने कहा कि हमें महात्मा गांधी की विरासत सहेजने के लिए हमें ‘बड़े संघर्ष’ की तैयारी करनी ही होगी, न कि कभी-कभार लोकलुभावन तू-तू मैं-मैं कर कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेना चाहिए।

उन्होंने आगे लिखा, ‘आखिर में, हमारे विरोधी और मीडिया कुछ भी कहें, लेकिन मैं मानता हूं कि राहुल गांधी को इस विशाल पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर वापसी करनी चाहिए, जिसे सोनियाजी प्रेरित करती रहेंगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमें झटका लगा है लेकिन हम अपने प्रिय लोगों के दिलों को जीतने में फिर से कामयाब होंगे। कांग्रेस भारत को आजाद और परिपूर्ण जिंदगी दे सकती है, जहां एक-एक सिर बिना किसी भय या पक्षपात के ऊंचा उठा रहे।’

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