धर्म

जानिए महाशिवरात्रि की कथा, पूजाविधि और शिवप्रिय मंत्र

Maha Shivaratri 2020: देवादिदेव महादेव को समर्पित Maha Shivaratri पर्व देश-विदेश में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण महादेव के साथ देवी पार्वती, श्रीगणेश, कार्तिकेय देव के साथ नंदी की पूजा करते हैं। शिवालयों में इस दिन शिवभक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। भोलेनाथ अपने भक्तों को खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं और उनकी मनचाही मुराद को पूरा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भोलेनाथ सिर्फ व्रत करने से प्रसन्न हो जाते हैं।

Maha Shivaratri व्रत कथा

शिव पुराण में Maha Shivaratri की कथा का वर्णन किया गया है। इसके अनुसार पुराने समय में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। वह जानवरों का शिकार करके वह अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उसके ऊपर एक साहूकार का कर्ज था, लेकिन वह उसका कर्ज समय पर चुका नहीं सका। इससे नाराज होकर साहूकार ने चित्रभानु को पकड़कर कैद कर लिया। संयोग से उसी दिन Maha Shivaratri का पर्व था। मुसीबत में उलझे शिकारी ने भगवान शिव का स्मरण करते-करते सारा दिन गुजार दिया। चित्रभानु ने अगले दिन चतुर्दशी को नजदीक हो रही भगवान शिव की कथा भी सुनी। तभी शाम के समय साहूकार आया और उसको अगले दिन तक कर्ज चुकाने की मियाद देकर मुक्त कर दिया।

इधर भूख-प्यास से परेशान होकर शिकार खोजता हुआ चित्रभानु बहुत दूर निकल गया। जब चारों और अंधेरा हो गया तो उसने सोचा कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह जंगल में एक तालाब के किनारे एक बेल के वृक्ष पर चढ़ कर सूर्योदय का इंतजार करने लगा।

बिल्व वृक्ष के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था इस शिवलिंग के ऊपर शिकारी के द्वारा तोड़े हुए बिल्व पत्र गिर रहे थे। शिकारी को इस बात की जानकारी नहीं थी। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का Maha Shivaratri का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी समर्पित हो गए। सूर्योदय होते ही एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची। शिकारी धनुष पर तीर चढ़ाकर उसका शिकार करने लगा। तभी हिरणी ने शिकारी चित्रभानु से कहा, ‘मैं गर्भवती हूं। शीघ्र ही बच्चे को जन्म दूंगी। एक साथ दो जीवों की हत्या करना उचित नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी, तब मुझे अपना शिकार बना लेना।

चित्रभानु ने शिकार का विचार त्याग दिया और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने और ढीली करने के समय कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस तरह चित्रभानु से अनजाने में ही पहले प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया।

शिव की तपस्या से मिला शिवलोक में स्थान

कुछ दिनों के इंतजार के बाद हिरणी उस स्थान से गुजरी तो शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। नजदीक आने पर चित्रभानु ने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसको देख हिरणी ने निवेदन किया, ‘हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं और अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर जल्द ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।’ शिकारी को फिर से उसके ऊपर दया आ गई और वह इस बार भी उसे जाने दिया। वह काफी चिंता में पड़ गया। इस तरह से रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे और दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई।

कुछ देर बाद हिरणी जब वापस आई तो शिकारी फिर से उसे अपना शिकार बनाने की कोशिश की, लेकिन हिरणी ने कहा, मैं अपने बच्चों को उसके पिता के पास छोड़ दूं इसके बाद मुझे अपना शिकार बनाना। लेकिन इस बार शिकारी हिरणी की बात मानने को तैयार न हुआ। बोला मैं इससे पहले भी तुम्हें दो बार छोड़ चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से परेशान हो रहे होंगे। तब हिरणी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों का ख्याल आ रहा है, ठीक वैसे ही मुझे भी। शिकारी! मेरा विश्वास करों, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने का वचन देती हूं।

इस प्रकार प्रात: हो आई। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई। पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला। शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया। उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया। थोड़ी ही देर बाद हिरण अपने परिवार के साथ शिकारी के सामने उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, लेकिन जंगली पशुओं की ऐसी सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसने हिरण को परिवार सहित जीवनदान दे दिया।

अनजाने में ही Maha Shivaratri के व्रत का पालन करने से शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब देह अवसान के बाद यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया और शिकारी को शिवलोक ले गए। शिव जी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म की बातों को याद रख पाए और महाशिवरात्रि के महत्व को जान कर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए।

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