जानिए इस्लाम क्या कहता है चंद्रग्रहण के बारे में

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नई दिल्ली। 21वीं सदी का सबसे बड़ा चंद्रग्रहण 27 जुलाई 2018 को पड़ रहा है। इस दिन चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसको ‘ब्लड मून’  का नाम दिया गया है। 27 जुलाई का चंद्रग्रहण इस सदी का सबसे प्रभावशाली चंद्रग्रहण माना जा रहा है। वही बता दें की अलग-अलग धर्मों में ग्रहण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। तो आइए जानते हैं इस्लाम धर्म में इस ग्रहण  को लेकर क्या महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं।

जन्नत और धरती की भी चीजों स्थिर रखने वाला सिर्फ अल्लाह तआला

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इस्लाम धर्म में ये माना जाता है कि स्वर्ग यानी जन्नत और धरती पर जितनी भी चीजें हैं, उन सभी को बनाने और स्थिर रखने वाला सिर्फ अल्लाह तआला है। कुरान में कई जगह अल्लाह तआला की कुदरत का जिक्र किया गया है। कुरान की आयत (7:54) में कहा गया है कि ‘वो अल्लाह ही है जिसने सूरज, चांद और तारों के साथ सभी चीजों को बनाया है। ये सभी अल्लाह के हुक्म का पालन करती हैं।’

पैगंबर के दुख के कारण सूरज पर ग्रहण लगा 

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कुरान की आयत (21:33) में कहा गया है कि ‘वो अल्लाह है जिसने रात और दिन के साथ सूरज और चांद को भी बनाया है। आसमान में रहने वाली सभी खगोलीय पिंड अपनी ऑर्बिट में घूमती हैं।’ इस्लाम धर्म में सूर्य ग्रहण के दौरान सभी मुस्लिम मर्दो और औरतों को ‘सलात-अल-खुसूफ’  नमाज अदा करने की हिदायत दी गई है। पैगंबर हज़रत मुहम्मद के बेटे हजरत इब्राहिम की मौत सूर्यग्रहण लगा था। अभी से कहा गया है कि, पैगंबर के बेटे की मौत होने से पैगंबर बेहद दुखी हैं, जिस वजह से सूरज पर ग्रहण लग गया है।

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अल्लाह तआला का शुक्रगुजार होने की 3 वजह 

इसपर पैगंबर ने कहा था कि चांद और सूरज पर ग्रहण किसी की मौत के कारण नहीं लगता है, बल्कि ये अल्लाह की तरफ से दिए गए संकेतों में से 2 संकेत हैं। इन्हें देखने के बाद उठकर नमाज पढ़ें और इबादत करें। इस्लाम में अल्लाह तआला का शुक्रगुजार होने की वजहें- पहला, चंद्र और सूर्य ग्रहण अल्लाह तआला की ताकत और कुदरत को दिखाता है। दूसरा, हज़रत मोहम्मद के साथी हजरत अबु बक्र का कहना था कि, सूरज या चांद पर ग्रहण लगने से लोग डर जाते हैं। जिसके बाद मुस्लिम लोग अल्लाह से उसके रहम की पुकार लगते हैं। तीसरा, हजरत अबु मूसा का कहना था कि ग्रहण कयामत के दिन की याद दिला देता है।

ग्रहण के समय अल्लाह को याद करे और गुनाहों की माफी मांगे 

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सूरज पर ग्रहण लगते ही पैगंबर हज़रत मुहम्मद कहते थे कि ये कयामत का वक़्त हो सकता है। वह मस्जिद की ओर जाते और नमाज पढ़ते और सबसे लंबा कियाम करते थे। इसके बाद वह कहते थे कि ये अल्लाह का इशारा है, इसका किसी के जीवन से या मौत से ताल्लुक बिलकुल नहीं है बल्कि अल्लाह तआला अपने बंदों को डरा रहे है। इसलिए जब भी ग्रहण देखो, अल्लाह को याद करो और उससे अपने गुनाहों की माफी भी मांगो।

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पैगंबर नमाज पूरी कर के उठते तो सूरज ग्रहण हट चुका होता

इस्लाम में ग्रहण के वक्त नमाज अदा करने का तरीका-हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर ने ग्रहण के वक्त लोगों को हुजूम के साथ दो रकात नमाज अदा करने की सलाह भी दी थी। हजरत अबु बक्र ने कहा था, पैगंबर साहब की जिंदगी में जब भी सूरज पर ग्रहण लगता था तो वह अल्लाह की बारगाह में दो रकात नमाज को अदा करते थे। हजरत आयशा का कहना था कि जब पैगंबर हज़रत मुहम्मद नमाज पूरी कर के उठते थे तो सूरज पर लगा ग्रहण पूरी तरह से हट चुका होता था।

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 इस्लाम का मानना:  जन्नत और जमीन की हर चीज पर अल्लाह की हुकूमत

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आधुनिक जीवन में ग्रहण को लेकर डर और अंधविश्वास खत्म हो चुका है। हालांकि, आज भी कई मुस्लिम लोग चांद या सूरज पर ग्रहण लगने के दौरान अल्लाह को याद करते हैं। मुस्लिमों का मानना है कि जन्नत और जमीन की हर एक चीज पर सिर्फ अल्लाह की ही हुकूमत है।

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