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जानिए आखिर क्यों ‘एपल’ ग्राहकों को नहीं दे रहा चार्जर, हुआ बड़ा खुलासा

Apple

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हम सब के दिमाग में एक सवाल जरूर आता है कि इतनी बड़ी कंपनी एपल इतने महंगे फोन्स बेच रही है और फोन को चार्ज करने के लिए चार्जर नहीं देती है। आज इस बात का खुलासा हो गया है। आइये जानते है ऐसा क्यों होता है।

एपल ने जब इस बात का ऐलान किया था कि, वो आईफोन 12 सीरीज के बॉक्स में इयरपॉड्स और चार्जर नहीं देगा तो कई ग्राहकों को झटका लगा था। इसके बाद कई यूजर्स ने तो ये मन बना लिया था कि अब वो पूरी तरह एंड्रॉयड पर शिफ्ट हो जाएंगे, क्योंकि आज भी एंड्रॉयड में यूजर्स को चार्जर और इयरफोन मिलता है। विवाद बढ़ता देख एपल ने इस मामले में अपनी सफाई भी दी और कहा कि, कंपनी कार्बन फुटप्रिंट को कम करना चाहती है और उसका लक्ष्य है कि वो प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करेगी।

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एपल ने अपने बयान में ये भी कहा था कि, वो साल 2030 तक कार्बन न्यूट्रल कंपनी बनना चाहती है। लेकिन अब लेटेस्ट रिपोर्ट में इन आंकड़ों का खुलासा हो चुका है। एपल की मिनी साइट के अनुसार, लेटेस्ट एनवायरनमेंटल प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार, कूपर्टीनो जाएंट कंपनी ने 861,000 मेट्रिक टन कॉपर, टिन और जिंक को बचाया है। ये सबकुछ तभी मुमकिन हो पाया जब कंपनी ने पिछले साल आईफोन बॉक्स से पावर एडैप्टर निकालने का फैसला किया था।

कंपनी ने यहां क्लाउड आधारित और एआई सर्विस जैसे iCloud, सिरी, iMessage के बारे में भी बात की। यानी की ये सभी सर्विस अब संधारणीय ऊर्जा (सस्टेनेबल एनर्जी) पर चलते हैं। जबकि हार्डवेयर के मामले में इंटेल चिप से एपल M1 चिप पर जाने का फैसला कंपनी का फायदे का सौदा साबित हुआ और कंपनी ने 34 प्रतिशत कार्बन फुटप्रिंट को किम किया।

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वहीं Esbjerg और Denmark में आईफोन मेकर विंड टर्बाइन ने इतना ज्यादा एनर्जी उत्पादित किया है कि, हर साल कुल 20,000 घरों को बिजली दी जा सकती है। बता दें कि एपल के इस आंकड़े के बाद अब लोग कंपनी की तारीफ कर रहे हैं। यहां कंपनी वातावरण को बचाने को लेकर कई सख्त कदम उठा रही है और लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रही है।

चार्जर न देने से एपल पर लग चुका है 14 करोड़ का जुर्माना
एपल ने जब चार्जर ने देने के ऐलान किया था तो ग्राहकों के साथ दुनिया की कई दूसरी कंपनियों ने इसे गलत बताया था, ऐसे में ब्रजील की कंज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंसी Procon-SP ने उस दौरान एपल पर इसके लिए 2 मिलियन डॉलर (करीब 14 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था। कंपनी पर आरोप लगाया था कि वो ग्राहकों को बेवकूफ बना रही है और भ्रामक विज्ञापन से अपने प्रोडक्ट की सेल कर रही है। वहीं इस दौरान ये भी कहा गया था कि एपल के इस कदम से वातावरण पर कोई असर नहीं दिख रहा है। लेकिन अब हो सकता है कि, इस रिपोर्ट के आने के बाद कई लोगों के मुंह पर ताले लग जाएं।

 

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