• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

10वीं शताब्दी में चंद शासनकाल से खेली जा रही है कुमाउंनी शास्त्रीय होली

Desk by Desk
28/03/2021
in Main Slider, उत्तराखंड, ख़ास खबर, फैशन/शैली, राष्ट्रीय
0
Kumauni Classical Holi
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नैनीताल। देशभर में फाल्गुन पूर्णिमा पर मौज-मस्ती के साथ होली खेली जाती है, लेकिन कुमाऊं में परंपरागत कुमाउंनी बैठकी होली यानी अर्ध शास्त्रीय गायकी युक्त होली होती है। लगभग तीन महिने तक चलने वाली होली की शुरुआत पौष माह के पहले रविवार से ही विष्णुपदी होली गीतों के साथ हो जाती है।

कुमाऊं की शास्त्रीय होली की शुरुआत करीब 10वीं शताब्दी में चंद शासनकाल से मानी जाती है। कुछ विद्वानों के अनुसार चंद शासनकाल में बाहर से ब्याह कर आयीं राजकुमारियां अपनी परंपराओं व रीति-रिवाजों के साथ होली भी यहां साथ लेकर आयीं।

CM तीरथ ने प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं, कहा-गाइडलाइन का पालन करें

वहीं अन्य विद्वानों के अनुसार प्राचीनकाल में यहां के राजदरबारों में बाहर के गायकों के आने से यह परंपरा आई है। कुमाऊं के प्रसिद्ध जनकवि स्वर्गीय गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के अनुसार कुमाऊं की शास्त्रीय गायकी होली में बृज व अवध से लेकर दरभंगा तक की परंपराओं की छाप स्पष्ट रूप से नजर आती है तो नृत्य के पद संचालन में ठेठ पहाड़ी ठसक भी मौजूद रहती है।

इस प्रकार कुमाउंनी होली कमोबेश शास्त्र व लोक की कड़ी तथा एक-दूसरे से गले मिलने जैसे आपसी प्रेम बढ़ाने वाले त्यौहारों की झलक भी दिखाती है। साथ ही कुमाउंनी होली में प्रथम पूज्य गणेश से लेकर गोरखा शासनकाल से पड़ोसी देश नेपाल के पशुपतिनाथ शिव की आराधना और ब्रज के राधा-कृष्ण की हंसी-ठिठोली से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और उत्तराखंड आंदोलन की झलक भी दिखती है, यानी यह अपने साथ तत्कालीन इतिहास की सांस्कृतिक विरासत को भी साथ लेकर चली हुई है।

होली और शब-ए-बारात के पावन पर्व की सभी को शुभकामनाएं : रविन्द्र माॅदड़, डीएम

बॉलीवुड में भी प्रदेश के लोक संगीत को पहचान दिलाने वाले प्रभात साह गंगोला सहित अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि इसका इतिहास प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा की स्थापना से भी पूर्व से चार शताब्दियों से भी अधिक समय पुराना है।

इनके अनुसार कुमाउंनी होली का मूल स्वरूप काली कुमाऊं से खड़ी होली के स्वरूप में आया होगा, लेकिन चंद वंशीय शासकों की राजधानी अल्मोड़ा में उस दौर के प्रख्यात शास्त्रीय गायक अमानत अली खां और गम्मन खां की शागिर्द ठुमरी गायिका राम प्यारी जैसी गायिकाएं यहां आईं और स्थानीय शास्त्रीय संगीत के अच्छे जानकार शिव लाल वर्मा आदि उनसे संगीत सीखने लगे। वह 14 मात्रा में पूरी राग-रागिनियों के साथ होली गाते थे।

होली पर इस बार बनाएं ये खास तरह की स्वादिष्ट और खुशबूदार गुझिया

ऐसे ही अन्य बाहरी लोगों के साथ कुमाउंनी होली में ब्रज, अवध व मगध के अष्टछाप कवियों के ईश्वर के प्रेम में लिखे गीत आए। कालांतर में होलियों का मूल शास्त्रीय स्वरूप वाचक परंपरा में एक से दूसरी पीढ़ी में आते हुए और शास्त्रीय संगीत की अधिक गहरी समझ न होने के साथ लोक यानी स्थानीय पुट से भी जुड़ता चला गया और कुमाउंनी होली कमोबेश शास्त्र व लोक की कड़ी सी बन गई।

कुमाउंनी होली की एक और खासियत यह भी है कि यह पौष माह के पहले रविवार से ही शुरू होकर फाल्गुन माह की पूर्णिमा तक सर्वाधिक लंबे अंतराल तक चलती है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि (प्राचीन काल में) शीतकाल में पहाड़ों में कृषि व अन्य कार्य सीमित होते थे। ऐसे में लंबी रातों में मनोरंजन के साधन के तौर पर भी होली गायकी के रात-रात लंबे दौर चलते थे।

होली पर मिलावटी खोया से रहें दूर, ऐसे करें असली मावे की पहचान

यह परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जाती है। कुमाउंनी होली में विभिन्न प्रहरों में अलग-अलग शास्त्रीय रागों पर आधारित होलियां गाई जाती हैं। शुरुआत बहुधा धमार राग से होती है, और फिर सर्वाधिक काफी व पीलू राग में तथा जंगला काफी, सहाना, बिहाग, जैजैवन्ती, जोगिया, झिंझोटी, भीम पलासी, खमाज व बागेश्वरी सहित अनेक रागों में भी बैठकी होलियां विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गाई जाती हैं।

Tags: Happuy HoliHoliholi 2021Kumauni Classical HoliUttrakhand News
Previous Post

सत्ता के नशे में चूर भाजपा कार्यकर्ता कानून व्यवस्था के लिए खतरा : अखिलेश

Next Post

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की FIRE NOC की होगी जांच, निदेशक को दी जाएगी नोटिस

Desk

Desk

Related Posts

CM Dhami
Main Slider

नारी शक्ति को मिलेगा पूरा अधिकार, सीएम धामी बोले- महिला आरक्षण ऐतिहासिक कदम

15/04/2026
Gorakhpur's name entered in the Guinness Book for AI awareness
Main Slider

बड़ी खबर! एआई जागरूकता पर गिनीज बुक में दर्ज हुआ गोरखपुर का नाम

15/04/2026
CM Dhami
राजनीति

देहरादून में नेशनल टेबल टेनिस चैंपियनशिप का आगाज, सीएम धामी ने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह

15/04/2026
Anand Bardhan
राजनीति

हर स्कूल में बजेगी वॉटर बेल, हीटवेव से बचाव को सरकार अलर्ट

15/04/2026
CM Dhami
राजनीति

युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की असली ताकत : सीएम धामी

15/04/2026
Next Post
DG Fire

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की FIRE NOC की होगी जांच, निदेशक को दी जाएगी नोटिस

यह भी पढ़ें

इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2020 Indian Mobile Congress 2020

दुनिया की नजर कम कीमत वाली, सबसे सुर​क्षित कोरोना वैक्सीन पर है : पीएम मोदी

04/12/2020
Saryu Aarti

अयोध्या दीपोत्सव 2025: योगी सरकार की प्रेरणा से सरयू तट पर गूंजेगी मां सरयू की महाआरती

17/10/2025
CM Yogi

चिंता मत करिए, सबकी समस्या का कराएंगे समाधान : सीएम योगी

03/09/2023
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version