तालिबान आतंकवादी समूहों को धन मुहैया कराता है हाफ़िज़ सईद : यूएन रिपोर्ट

हाफ़िज़ सईदहाफ़िज़ सईद
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नई दिल्ली। भारत के साथ साथ दुनिया भर में आतंकवाद और अस्थिरता पैदा करने के लिए पाकिस्तान का लश्कर -ए -तैयबा भारत के करीबी दोस्त अफगानिस्तान के युवकों को आतंकी संगठनों में भर्ती कर भारत समेत अन्य देशों के खिलाफ भड़का रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जारी एक रिपोर्ट में बताया गया पाकिस्तान का लश्कर -ए -तैयबा आतंकी संगठन अफगानिस्तान में तालिबान और अन्य आतंकवादी समूहों में भर्ती और धन मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वैश्विक आतंकी हाफ़िज़ सईद द्वारा स्थापित लश्कर ए तैयबा पाकिस्तान में शिविरों, मदरसों और अन्य सुविधाओं का एक व्यापक नेटवर्क है जो कि मुख्य आतंकी संगठन जमात -उद-दावा द्वारा संचालित किया जाता है। जो अक्सर अफगानिस्तान में विदेशी बलों को निशाना बनाता है। संयुक्त राष्ट्र के विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली टीम ने तालिबान पर प्रतिबंध पर नज़र रखने वाली 1988 की प्रतिबंध समिति को रिपोर्ट सौंपी है जिसमे कहा गया है लश्कर ‘ अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में भर्ती और वित्तीय सहायता गतिविधियों में महत्वपूर्ण सूत्रधार के रूप में कार्य करना जारी रखता है, जो कि “विदेशी आतंकवादी लड़ाकों के लिए मुख्य क्षेत्र है ।

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रिपोर्ट में अफगान अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि अकेले लाहौर के कुनार और नंगरहार प्रांतों में लश्कर के 500 लड़ाके सक्रिय हैं। जो की पिछले महीने पेंटागन की एक रिपोर्ट में अनुमान से काफी अधिक है जिसमे कहा गया था कि लश्कर के पूरे अफगानिस्तान में लगभग 300 लड़ाके हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर ने कथित तौर पर तालिबान और आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट) के बीच संबंधों को प्रबंधित करने की कोशिश थी लेकिन हाल ही में इसने आईएसआईएल से खुद को दूर कर लिया है और खुद अलग से कार्य कर रहा है। अफगानिस्तान में 8,000 से 10,000 विदेशी आतंकवादियों में से अधिकांश पाकिस्तान से हैं, जिसमें मोहम्मदाबाद, बाजौर, ओरकजई और दक्षिण और उत्तरी वजीरिस्तान की आदिवासी ​​शामिल हैं।

मई 2018 में एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम द्वारा प्रस्तुत एक अन्य रिपोर्ट में लश्कर की भर्ती और फंड जुटाने की गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी सामने आई थी । उस रिपोर्ट में कहा गया था कि लश्कर के तालिबान, अल-कायदा के साथ संबंध और सौहार्दपूर्ण संबंध थे। मई 2018 की रिपोर्ट में कहा गया था। अफगान वार्ताकार ने संकेत दिया कि (LeT) ने पाकिस्तान के अंदर अपंजीकृत मदरसों के नेटवर्क से भर्ती की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मदरसों से निकलने के बाद, सेनानियों ने अफगानिस्तान की ओर कदम बढ़ाया, जहां वे मौजूदा आ’तंकवादी समूहों में शामिल हो गए।

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