लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज : कोर्ट ने बड़ी कार्रवाई, जयप्रकाश के नियंत्रण वाली कमेटी पर लगी रोक 

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लखनऊ। लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज का आखिरकार, सत्य खुलकर सामने आ ही गया। अभी तक दूसरों को भू-माफिया और स्कूल पर कब्जा करने का षड़यंत्रकारी बता रहे जय प्रकाश के नियंत्रण वाली प्रबंध समिति पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। शिक्षा विभाग की मंडलीय समिति के बीते दो मई 2018 को जारी आदेश के आधार पर जय प्रकाश को प्रबंधक बनाया गया था। कोर्ट ने दो मई 2018 के इस कार्रवाई पर स्टे लगा दी है।

लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज

अभी तक ये लोग दूसरों को भू-माफिया और स्कूल पर कब्जा करने का आरोप लगा रहे थे। लेकिन, कोर्ट की इस बड़ी कार्रवाई से अब सच सामने आ गया है।

एक याचिका की सुनवाई में  मंगलवार को माननीय न्यायालय ने यह आदेश जारी किया है। जिसे गुरुवार देर शाम न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

स्कूल का संचालन करने वाले द रफी अहमद किदवई मॉन्टेसरी मेमोरियल ट्रस्ट की  साधारण सभा के 88 सदस्यों की ओर से यह याचिका दायर की गई थी।

इस फैसले से 21 मई को जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से जय प्रकाश के प्रबंधक के रूप में हस्ताक्षर प्रमाणित किए जाने संबंधी आदेश पर भी स्वत: रोक लग गई है।

 

अब,  सामने आएंगे  घोटालेबाजों के चेहरे

जय प्रकाश ने बीते पांच नवम्बर को खुद ही चुनाव कराकर स्कूल का संचालन करने वाली समिति का प्रबंधक बन बैठा था। शिक्षा विभाग की रोक के बावजूद यह खेल हुआ।  अभी तक इस व्यक्ति को प्रबंधक की मान्यता नहीं मिली थी, बावजूद स्कूल के खाते से पैसे निकाले गए। इस फैसले के बाद ऐसे कई और घोटाले सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

जनता को गुमराह करने के लिए गढ़ी थी भू माफिया की कहानी

जानकारों की मानें तो, स्कूल को इस स्वयंभू प्रबंधक और उसकी टीम से बचाने के लिए 18 मई को कोर्ट की शरण ली। जयप्रकाश और उनकी टीम को जब लगा कि वह कमजोर हैं तो उन्होंने भू माफिया और स्कूल पर कब्जे की कहानी गढ़ी। लोगों की संवेदनाओं का इस्तेमाल किया। मंगलवार को कोर्ट में  मूंह की खाने के बाद वह फिर इस खेल को शुरू कर दिया है।

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सरकार बैठाए कंट्रोलर, खुद कराए चुनाव

याचिका दायर करने वाले पक्ष का कहना है कि वह स्कूल की किसी भी समिति या कमेटी में कोई पद या लाभ नहीं चाहते। उनका उद्देश्य स्कूल को बचाना है। इसीलिए संघर्ष कर रहे हैं। अभी तक कोई कागज न होने के कारण चुप बैठे थे। कोर्ट के इस फैसले ने उन्हें न्याय दिलाया है। मांग है कि स्कूल में कंट्रोलर बैठकर सरकार और शिक्षा विभाग इसे अपने हाथ में ले और अपनी देख रेख में खुद चुनाव कराए।

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