लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज : स्वयंभू प्रबंधक जय प्रकाश ने स्कूल के खातों से निकाले लाखों रुपये 

लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज
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लखनऊ। लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज में स्वयंभू प्रबंधक बनकर बैठे जय प्रकाश के हस्ताक्षर 21 मई को जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रमाणित किए थे। हालांकि उच्च न्यायालय के स्टे ऑडर के कारण अब यह भी प्रभावी नहीं है, लेकिन विभाग से मान्यता मिलने से पहले ही इस स्वयंभू प्रबंधक ने स्कूल के खातों से पैसे निकालने शुरू कर दिया था । पांच दिसम्बर 2017 को विद्यालय के खाते से धनराशि आहरित की।

लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज का अब खुलकर आया यह सच सामने

सालों से स्कूल का संचालन कर रहे अशोक कुमार चौबे को पांच अक्तूबर को कार्यवाहक प्रबंधक के पद से हटा दिया गया। उनसे जबरन इस्तीफा ले लिया गया।

लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज का वर्ष 2003 में स्कूल प्रबंध समिति का अन्तिम निर्विवादित चुनाव हुआ था। जिसमें, उमेश चन्द्रा को अध्यक्ष, बैज नाथ सिंह को उपाध्यक्ष, पुष्पावती तिवारी को प्रबंधक/सचिव और अशोक कुमार चौबे को उपाध्यक्ष/उप सचिव चुना गया। शिक्षा विभाग ने पुष्पावती तिवारी के हस्ताक्षर प्रमाणित किए। उनके हस्ताक्षर से शिक्षकों का वेतन पास हुआ। लेकिन उनके सीधे हाथ में चोट लगने के कारण अशोक कुमार चौबे को हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत कर दिया गया। पुष्पावती तिवारी का देहांत नवम्बर 2017 में हुआ। अपने जीवन काल में उन्होंने 193 सदस्यों की सूची (वर्ष 2015-16 और 2016-17)  डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में दाखिल की थी।

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  • अशोक चौबे के इस्तीफे के तत्काल बाद जय प्रकाश को प्रबंधक बना दिया गया। 16 अक्तूबर 2017 को जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखकर जय प्रकाश के हस्ताक्षर बतौर प्रबंधक/सचिव प्रमाणित करने को कहा।
  • जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने हस्ताक्षर प्रमाणित करने से पहले कुछ दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। 25 अक्तूबर 2017 को एक और पत्र शिक्षा विभाग को भेजा गया। जिसमें, चुनाव के लिए पर्यवेक्षक की मांग की।
  • जिला विद्यालय निरीक्षक ने 27 अक्तूबर 2017  को कॉलेज को तीन दिन का समय देते हुए प्रबंध समिति से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। 31 अक्तूबर को दोबारा पत्र भेजा गया। लेकिन, कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
  • 03 नवम्बर 2017 को  जिला विद्यालय निरीक्षक ने दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने के चलते अग्रिम आदेशों पर समिति का चुनाव कराने पर रोक लगा दी। डीआईओएस के इस आदेश को किसी भी सक्षम अदालत के सामने चुनौती नहीं दी गई। इसके बावजूद, 05 नवम्बर 2017 को चुनाव कराए गए। जिसमें, नवीन तिवारी को स्कूल प्रबंध समिति का अध्यक्ष और  जय प्रकाश को प्रबंधक/सचिव दिखाया गया। चुनाव कराने के बाद दस्तावेज डीआईओएस के सामने प्रस्तुत किए गए। डीआईओएस ने इस पर नोटिस जारी किया और एक जनवरी 2018 को सुनवाई निर्धारित कर दी।

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  • 08 दिसम्बर 2017 : इसी बीच स्कूल की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और शिक्षक व कर्मचारियों का वेतन देने के लिए स्कूल में एकल परिचालन की व्यवस्था लागू कर दी गई। जिसपर भी किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कोई सवाल नहीं उठाया गया। जय प्रकाश की ओर से 75 सदस्यों की एक सूची उपलब्ध कराई गई। यह सूची 24 जनवरी 2018 को डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटी चिट फंड के कार्यालय में पंजीकृत हुई।
  • 09 अप्रैल 2018 : डीआईओएस के बार-बार कहने पर भी यह स्वयंभू प्रबंधक और उनके कमेटी अपने पक्ष में कोई मजबूत दस्तावेज नहीं उपलब्ध करा पाई। आखिरकार, सात से आठ महीने की जांच के बाद डीआईएएस  ने स्कूल पर कंट्रोलर बैठाने की संस्तुति संयुक्त शिक्षा निदेशक को भेज  दी।
  • 02 मई 2018 : जिला विद्यालय निरीक्षक की रिपोर्ट और कंट्रोलर बैठाने की संस्तुति को उलट दिया गया।  संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेन्द्र तिवारी की अध्यक्षता वाली मंडलीय समिति ने पांच नवम्बर 2017 के चुनाव को मान्यता दे दी। जिसमें, जय प्रकाश को प्रबंधक/सचिव मान लिया गया।  इसी चुनाव को गलत मानते हुए अभी तक विभाग जांच कर रहा था। संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेन्द्र तिवारी और उनकी मंडलीय समिति के इस फैसले के खिलाफ 18 मई को  न्यायालय में चुनौती दी गई थी। 22 मई को इस फैसले पर न्यायालय ने रोक लगाई है।
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