मध्यम वर्ग के छात्रों की पहुंच से बाहर होता जा रहा लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ विश्वविद्यालय

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ना मध्यम वर्ग के छात्रों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। निजी शिक्षण संस्थानों की तरह ही लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की जेब से पैसे निकालने की हर संभव कोशिश कर रहा है। फीस वसूलने के मामले में यह पहले ही दूसरे राज्य विवि से काफी महंगा हो चुका है। लेकिन, अब यहां मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी पहुंच के बाहर हो गई हैं। सत्र शुरू होने के करीब साढ़े तीन महीने के अंदर ही सच सामने आ गया है। सेंट्रल मेस पहले ही महंगा है।

फीस वसूलने में सबसे आगे लखनऊ विश्वविद्यालय

प्रदेश में 16 राज्य विश्वविद्यालय हैं। जिनमें, सबसे पुराना लविवि है। पिछले कुछ वर्षों में यहां इतनी ज्यादा फीस बढ़ाई गई है कि सेल्फ फाइनेंस ही नहीं बल्कि रेगुलर कोर्स की फीस के मामले में भी लखनऊ विश्वविद्यालय ने दूसरे राज्य विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ दिया है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, वाराणसी समेत कई अन्य की फीस लविवि से काफी कम है।

परीक्षा शुल्क अन्य विवि के मुकाबले काफी महंगा

डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी फैजाबाद में परीक्षा शुल्क 500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक है। बीए, बीएससी, बी.कॉम और अन्य पारंपरिक कोर्स में परीक्षा शुल्क 500 रुपये है। वहीं, एमबीए और बीटेक जैसे कोर्स में ये 2,000 रुपये वार्षिक होता है। इसमें, छात्रों का एनरोलमेंट शुल्क भी शामिल है।

रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली में प्राइवेट छात्रों का एनरोलमेंट और परीक्षा शुल्क एक हजार रुपए से लेकर अधिकतम 2100 रुपये तक है। वहीं, रेगुलर में ये 1,750 से 2,100 रुपये तक है। लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय के मामले में ये बिलकुल उलट हो जाता है। यहां हर कोर्स की अपनी अलग-अलग एग्जाम फीस है। जोकि, एक हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये प्रति सेमेस्टर या ये कहें 10 हजार रुपए प्रति वर्ष तक जाती है।

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बैचलर ऑफ आर्ट (बीए)

लखनऊ विश्वविद्यालय: करीब 7,654 रुपये प्रति वर्ष
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ : करीब 2,060 रुपये प्रति वर्ष

बैचलर ऑफ आर्ट बीए (ऑनर्स)

लखनऊ विश्वविद्यालय: करीब 19,000 रुपये प्रति वर्ष
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय : करीब 8,745 प्रति वर्ष (इसे और कम करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

बी.कॉम सेल्फ फाइनेंस

लखनऊ विश्वविद्यालय: करीब 58 हजार रुपये प्रति वर्ष
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ : करीब 13 हजार रुपये प्रति वर्ष
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय : करीब 12 हजार रुपये प्रति वर्ष
बुंदेलखण्ड विवि:19,500 रुपये

एमबीए: प्राइवेट यूनिवर्सिटी से भी आगे

एलयू के फैकल्टी ऑफ कॉमर्स और इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के अधीन एमबीए कोर्स संचालित किया जा रहा है। यहां के सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस ने तो प्राइवेट यूनिवर्सिटी को भी पीछे छोड़ दिया है। दो साल का एमबीए कोर्स करने की फीस करीब तीन लाख रुपए है।

सेंट्रल मेस: सबसे महंगा खाना

लखनऊ विश्वविद्यालय की सेंट्रल मेस यहां की सबसे महंगी मेस है। दूसरे छात्रावासों में संचालित मेस में 80 रुपये तक में छात्रों को एक दिन का खाना मिलता है। वहीं, सेंट्रल मेस में यह शुल्क 110 रुपये के आसपास है।

कैंटीन: 40 प्रतिशत तक महंगी हुईं चीजें

कैंटीन का आवंटन टेंडर के द्वारा किया गया। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन का किराया तो बढ़ गया लेकिन, छात्रों को मिलने वाली चीजें 20 से 40 प्रतिशत तक महंगी हो गई। गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं है। क्योंकि, नए ठेकेदार ने पुराने कैंटीन संचालकों को काम सौंप दिया है।

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