लखनऊ: एटीएम कार्ड क्लोनिंग से ठगी करने वाले गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

एटीएम कार्ड क्लोनिंगएटीएम कार्ड क्लोनिंग

लखनऊ। यूपी एसटीएफ को मंगलवार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसटीएफ देश के अलग-अलग राज्यों में एटीएम कार्ड क्लोनिंग और उनका डाटा हैक करके हजारो लोगों को लाखों की ठगी करने वाले गैंग के मास्टरमाइंड को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी वाराणसी का रहने वाला है। जिसका नाम सुमित झिंगरन है साथ ही इसके पास 3 मोबाइल और 1 आईपैड भी बरामद किया गया है।

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एटीएम कार्ड क्लोनिंग के जरिए उड़ाए लाखों

यूपी एसटीएफ को काफी दिनों से एटीएम कार्ड क्लोनिंग करके पैसा निकलाने वाले गिरोहों के सक्रिय होकर घटनाओं को अंजाम देने की जानकारी मिल रही थी। बताया जा रहा है कि यह गैंग पिछले कई महीनों से देश के कई राज्यों में हजारों लोगों के एटीएम के क्लोन बनाकर और इनका डाटा हैक करके लोगों का पैसा एटीएम से निकाल चुका है। ये गैंग दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मुम्बई, हरियाणा, यूपी सहित विभिन्न राज्यों में सक्रिय है। जिसपर एसटीएफ काफी समय से इस गिरोह को पकड़ने की कोशिश कर रही थी।

इस मामले में पंजाब के अस्सिटेंट इन्सपेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस ने द्वारा यूपी एसटीएफ को जानकारी दी गयी कि उनके यहाँ भी एटीएम क्लोनिंग बनाने वाले गैंग को लेकर कई मामले सामने आये हैं उन्होंने इस गैंग से जुड़े कुछ सदस्य लखनऊ में मौजूद होने और उन्होंने गिरफ्तार करने की बात कही। जिसके बाद एसटीएफ ने पंजाब पुलिस के सहयोग गैंग का मास्टरमांइड को हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित अवध क्लार्क होटल से गिरफ्तार करा लिया। सुमित झिंगरन ने पूछताछ में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग व डाटा हैक करने की बात को कबूला है।

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एटीएम कार्ड क्लोनिंग की ट्रेनिंग कॉल सेंटर में मिली

पूछताछ में अभियुक्त सुमित झिंगरन ने बताया कि वर्ष 2013-2014 में येलो पेजेज कॉल सेन्टर (US Process) में काम करता था, जहाँ पर उसकी दोस्ती काॅल सेंटर के विक्की नाम के व्यक्ति से हुई, जिससे आरोपी ने कार्ड क्लोनिंग के बारे में सीखा। कार्ड क्लोनिंग के लिए एक लैपटाप एवं SKIMMER (Reading/Writing Device) की जरुरत होती है। यह SKIMMER उसने कोयम्बटूर से एक सप्लायर से कोरियर के माध्यम से प्राप्त किया था, जो आनलाइन Flipkart, ebay, Amazon से मंगवाता था।

उसके द्वारा विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब, मुम्बई, चंडीगढ़, हरियाणा, पष्चिम बंगाल सहित अनेक राज्यों में स्थित नामी गिरामी होटल, बार, रेस्टोरेन्ट मे कार्यरत वेटर व कर्मचारी से सम्पर्क कर उनको रीडर डिवाइस उपलब्ध कराता था। जब भी कोई ग्राहक उक्त सुविधा का उपभोग करने के लिए अपना एटीएम कार्ड पेयमेन्ट करने के लिए देता था तो वह कार्ड का डाटा स्कीमर से कैप्चर कर लेता था और एटीएम पिन को लिख लेता था।

इसके बाद डेबिट/क्रे्रडिट कार्ड के अन्तिम चार अंक व पासवर्ड नोट कर दो से ढाई हजार रूपये में प्रति कार्ड के हिसाब से हासिल कर लेता था कर लेते थे जिसके बाद कलेक्ट किए गए डाटा को फर्जी नाम व पते पर लिए गए बिग बाजार कार्ड, शाॅपिंग सेंटरो के कार्ड एव्ंा ब्लैंक कार्डों पर डाटा को बर्न करएटीएम में जाकर धनराषि निकाल लेते थे और उन्हीं कार्डों से शापिंग भी कर लेते थे।

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