दलित समर्थक छवि से दूर हो रही मायावती? SC/ST पदोन्नत पर दिया ऐसा बयान

पदोन्नतपदोन्नत

लखनऊ। बुधवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सरकारी कर्मियों के पदोन्नत में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारी नौकरी के प्रमोशन में SC/ST कर्मियों को आरक्षण मिलेगा। वहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपना बयान दिया है। मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कुछ हद तक समर्थन करती हूं। लेकिन साल 2007 में मेरे इस क्षेत्र में उठाये कदम पर सुप्रीम कोर्ट ने नजर नहीं डाला है।

SC/ST पदोन्नत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूरी सहमत नहीं है

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनुसूचित जाति-जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नत में आरक्षण मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा है कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फैसले पर फिर से विचार की जरूरत नहीं है। लेकिन दलितों का पक्ष रखने वाली मायावती ने कहा​ कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला कुछ हद तक स्वागत योग्य है। कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण पर रोक नहीं लगाई है और साफ कहा है कि केंद्र या राज्य सरकार इस पर निर्णय लें। मायावती ने कहा कि वर्तमान सरकार की मनमानी को देखकर लगता है कि वो तुरंत इसको लागू करने का प्रयास नहीं करेगी। इसलिए मायावती ने मांग की है कि इसको जल्द से जल्द लागू किया जाए और इसपर विशेष नजर रखा जाए।

हालांकि मायावती का दलित पक्ष में इतना बदलाव दर्ज होना चिंताजनक है। बता दें कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने भी मायावती को दलित विरोधी बताया था। आजाद ने कहा था कि मायावती दलितों को सिर्फ वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करती है। उन्होंने दलितों के सम्मान के लिए कुछ नहीं किया है। वहीँ मायावती ने भी चंद्रशेखर आजाद के बुआ कहने का विरोढ जताते हुए कहा था कि मेरा ऐसे किसी भी शख्स से कोई रिश्ता नहीं है।

ये भी पढ़ें : आधार कार्ड पर SC का फैसला, इन सेवाओं में आधार की जरूरत नहीं 

नागराज मामले में सुनाया फैसला

प्रमोशन में SC/ST को आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के 5 जजों के बेंच ने यह फैसला सुनाया है। जिसके तहत उच्चतम न्यायालय ने केंद्र व राज्य सरकार के दलीलों को स्वीकार कर लिया है। सरकारी नौकरी के प्रमोशन में एससी-एसटी को आरक्षण दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गयी थी। जिसमें सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशीय खंडपीठ ने नागराज के फैसले को एक बड़े खंडपीठ में संदर्भित करने से इंकार कर दिया।

loading...
Loading...

You may also like

पांच हत्याओं में सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल को आज फांसी या उम्रकैद

हिसार| तथाकथित संत रामपाल पर आरोप तय हो