शिक्षा की सार्थकता तभी, जब व्यवहार में उतरे : प्रदीप दुबे

शिक्षा
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लखनऊ। प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप दुबे ने कहा कि किसी भी शिक्षा की सार्थकता तभी है, जब उसे व्यवहार में उतारा जाये और उस शिक्षा का जीवन उपयोग हो। पत्रकारिता के छात्रों ने अपनी विद्या की सार्थकता को साबित करने का कार्य किया है।

पत्रकारिता एक स्वतंत्र और शक्तिशाली संचार का साधन

उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता एक स्वतंत्र और शक्तिशाली संचार का साधन है और जनमत को प्रभावित करती है। अतः पत्रकारिता संस्थानों को स्वनियमन के परिपालन का बखूबी ध्यान देने की जरूरत है। यह बात शिया पीजी कालेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा बुधवार  खतीब-ए-अकबर अवार्ड समारोह एवं पूर्व छात्र सम्मेलन में मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप दुबे ने कही। इस अवसर पर  पत्रकारिता विभाग के मेधावी छात्रों के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट भूमिका निभाने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।

‘हाऊ टू क्रियेट पॉजिटिव चेन्ज इन 21 सेंचुरी’ का विमोचन

 खतीबे अकबर अवार्ड पाने वालों में एनबीटी के राहुल मिश्रा व सुनील मिश्रा, लेखिका सारा खान, ऑडिशन टाइम्स की कौशिकी त्रिपाठी, विधानसभा में समीक्षा अधिकारी आदित्य द्विवेदी व ईटीवी हैदराबाद की संध्या यादव रहीं। इसके अलावा 50 से अधिक पूर्व छात्रों को जो पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें भी विभाग की तरफ से मोमेन्टों प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभाग की छात्रा और लेखिका सारा खान की बुक ‘हाऊ टू क्रियेट पॉजिटिव चेन्ज इन 21 सेंचुरी’ का विमोचन भी किया गया।

आमजन के भरोसे को कायम रखने की चुनौती : प्रांशु

 विशिष्ट अतिथि पत्रकार प्रांशु मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता एक चुनौती है, आमजन का सबसे अधिक भरोसा लोकतंत्र के इसी स्तम्भ से है। अतः छात्रों के लिए जनता के इस भरोसे को बनाये रखना ही सच्ची पत्रकारिता होगी। उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों से इसकी शक्ति का अहसास कराते हुए कहा कि उन्हें वैचारिक मतभेदों को भुलाकर इस क्षेत्र में अपने पत्रकारीय व निष्पक्ष दायित्वों का निर्वहन करना चाहिये।

छात्रों के हुनर देख लगा कि खतीब-ए-अकबर के सपनों को लगे पंख : यासूब अब्बास

 मौलाना यासूब अब्बास, प्रवक्ता, ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड, ने खतीब-ए-अकबर मौलाना मिर्जा मोहम्मद अतहर साहब को याद करते हुए कहा कि वर्षों पहले उन्होंने जो सपना देखा था। आज पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य कर रहे इन छात्रों को देखकर यह लगने लगा है कि खतीब-ए-अकबर के सपनों को पंख लग चुके है। खतीबे अकबर हमेशा मीडिया और शिक्षा को बढ़ावा देते रहे हैं, क्योंकि उनका स्पष्ट मानना था कि समाज में सुधार की गुंजाइश इनके माध्यम से ही हो सकती है। स्वागत भाषण इंचार्ज सेल्फ फाइनेंस डॉ. मिर्जा मोहम्मद अबु तैयब ने दिया तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरताज शब्बर रिजवी मौजूद थे ।  कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अजीज हैदर, प्रेसीडेन्ट, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज, शिया पीजी कालेज, ने किया तथा संचालन विभाग कोआर्डिनेटर डॉ. प्रदीप शर्मा ने किया।

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One thought on “शिक्षा की सार्थकता तभी, जब व्यवहार में उतरे : प्रदीप दुबे”

  1. Hi,

    There is a correction in my book’s name. It is How To Create Positive Change in 21 Days, whereas in the article century is mentioned in place of days.

    Requesting you to kindly make the changes at the earliest.

    Thanks,

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