भाजपा अध्यक्ष और नीतीश कुमार की मुलाकात, सीटों के बंटवारे पर जदयू नहीं देगी कोई प्रस्ताव

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पटना। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बिहार दौरे पर पहुंच चुके हैं। अमित शाह का ये दौरा लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर बेहद अहम होने वाला है। इस बैठक में दोनों के पार्टी के शीर्ष नेता की बातचीत पर भाजपा और जदयू ही नहीं बल्कि अन्य पार्टियों की भी नजर है। इस बैठक से साफ़ हो जायेगा कि लोकसभा का चुनाव दोनों पार्टियां साथ लड़ेंगी या फिर अकेले।

सूत्रों की माने तो सीटों के बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार भाजपा अध्यक्ष के सामने कोई प्रस्ताव नहीं देंगे। उनके इस रुख ये बात साफ़ हो जाती है। वह भाजपा के रुख पर ही अपनी बात रखेंगे इसे जदयू की तरफ से विरोधाभास के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का ये रहेगा कार्यक्रम का शेड्यूल

सबसे पहले नीतीश कुमार के साथ ब्रेकफास्ट करेंगे। इस दौरान अमित शाह दिनभर पार्टी नेताओं से मुलाकात करेंगे. शाह सुबह 11 बजे ज्ञान भवन में पार्टी के विस्तारकों की बैठक में भाग लेंगे। इसके बाद दोपहर 12.45 बजे ज्ञान भवन में ही सोशल मीडिया वालंटियर्स को संबोधित करेंगे। अमित शाह दोपहर 2.30 बजे बापू सभागार में शक्ति केंद्र प्रभारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद वह राजकीय अतिथिशाला में शाम 4 बजे से चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक में भाग लेंगे।

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बिहार की राजनीति के लिए अहम दिन

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को बिहार के राजधानी पटना पहुंचने वाले हैं। इस दौरान शाह और मुख्यमंत्री जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार से सुबह के नाश्ते और रात्रि भोज में उनकी मुलाकात तय है। इन दोनों नेताओं के मुलाकात को बिहार की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

शाह के इस दौरे पर सत्ता पक्ष ही नहीं , बल्कि विपक्ष की पैनी निगाह

संभवना व्यक्त की जा रही है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की बिहार यात्रा के दौरान न केवल नीतीश के जद (यू) से सीट बंटवारे पर चर्चा होगी बल्कि लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। ऐसे में अमित शाह के इस दौरे पर न केवल बिहार के सत्ता पक्ष के नेताओं की नजर है बल्कि विपक्ष भी इन नेताओं के मुलाकात पर पैनी निगाह रखे हुए है।

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भाजपा नहीं मानती है, तो 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है जदयू

आगामी चुनावों को लेकर भाजपा और जद (यू) के नेता सीट बंटवारे और बड़े भाई-छोटे भाई की भूमिका को लेकर आमने-सामने आते रहे हैं। बयानबाजी के दौरान जदयू ने यहां तक कह दिया था कि पिछले लोकसभा चुनाव के फॉमूर्ले पर चलते हुए उन्हें 40 में से 25 सीट लड़ने के लिए मिलनी चाहिए। जदयू ने यह भी कह दिया है कि अगर भाजपा नहीं मानती है, तो वह 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

जदयू और भाजपा के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं

हालांकि नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा कि जदयू और भाजपा के बीच में बड़ा भाई बनने की होड़ का कोई सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा था कि दोनों दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर जो बयानबाजी हो रही थी। वह बेमतलब है और जब चुनाव की तारीख पास आएगी।  तो दोनों दलों के आला नेता बैठकर इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे और मामले का निपटारा कर लेंगे।

पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू को मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा

बतातें चलें कि पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी। उसे मात्र दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। जबकि भाजपा को बिहार की 40 में से 22 सीटें मिली थीं। वहीं, सहयोगी दलों लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को क्रमश: छह और तीन सीटें मिली थीं। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर रालोसपा ने भी अधिक सीट पर दावेदारी कर रखी है।

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