एमजी एक ऐसी सेक्स बीमारी जो बन सकती है ‘सुपरबग’

एमजी
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नई दिल्ली।  एमजी वो संक्रामक यौन बीमारी है, जिस पर अगर ध्यान न दिया गया तो यह अगला सुपरबग साबित हो सकती है। इसकी चेतावनी दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ  दे रहे हैं। माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम एक जीवाणु है जिससे पुरुषों को पेशाब के रास्ते में सूजन हो सकती है। इससे जननांग से स्राव होता है और पेशाब करने में तकलीफ़ होती है।

एमजी से महिलाओं और पुरुषों, दोनों के जननांगों में हो सकता है संक्रमण

बतातें चलें कि आम तौर पर माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम (एमजी) के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते, लेकिन इससे महिलाओं और पुरुषों, दोनों के जननांगों में संक्रमण हो सकता है। ये इतना ख़तरनाक है कि इससे औरतों में बांझपन भी हो सकता है। एमजी के शुरुआती लक्षण आसानी से समझ में नहीं आते इसलिए इसका इलाज भी मुश्किल है और अगर इलाज ठीक से न हो तो इस पर एंटीबायोटिक्स भी बेअसर हो सकता है।

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इस संक्रमण को रोकने में कारगर साबित हो सकते हैं कंडोम

‘ब्रिटिश असोसिएशन ऑफ़ सेक्शुअल हेल्थ ऐंड एचआईवी’ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए बीमारी के बारे में नई सलाहें जारी की हैं।औरतों के जननांगों (गर्भाशय और फ़ैलोपियन ट्यूब) में एमजी की वजह से सूजन हो सकती है। इसका नतीजा दर्द, रक्तस्राव और बुखार के रूप में देखने को मिल सकता है। असुरक्षित यौन संबंध एमजी का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। कंडोम इस संक्रमण को रोकने में कारगर साबित हो सकते हैं। इसका पहली बार पता 1980 के दशक में ब्रिटेन में चला और माना गया कि एक से दो फ़ीसदी आबादी इससे प्रभावित रही।

इसका इलाज दवाइयों और एंटीबायोटिक्स से मुमकिन

एमजी के लक्षण हमेशा पता नहीं चल पाते और हमेशा इसके इलाज की ज़रूरत भी नहीं पड़ती, लेकिन ये नज़रअंदाज़ हो सकता है या फिर इससे क्लमेडिया जैसी दूसरी यौन संक्रमण वाली बीमारी होने का भ्रम भी हो सकता है। एमजी की जांच के लिए हाल में कुछ टेस्ट किए गए हैं, लेकिन ये सभी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं। इसका इलाज दवाइयों और एंटीबायोटिक्स से मुमकिन है, लेकिन कई मामलों में बीमारी पर दवाइयों का असर नहीं होता।

एंटीबायोटिक ‘एज़िथ्रोमाइसिन’ अब भी ज़्यादातर मामलों में कारगर

एमजी के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक्स ‘मैक्रोलिड्स’ का असर दुनिया भर में कम हुआ है। ब्रिटेन में लोगों पर इसके असर में तक़रीबन 40 फ़ीसदी कमी आई है। राहत की बात ये है कि दूसरी एंटीबायोटिक ‘एज़िथ्रोमाइसिन’ अब भी ज़्यादातर मामलों में कारगर है।ब्रिस्टल में डॉक्टर पीटर ग्रीनहाउस का का कहना है कि लोगों में एमजी को लेकर जितनी जागरूकता होगी, इसकी रोकथाम में उतनी ज़्यादा मदद मिलेगी। उन्होंने लोगों से कंडोम इस्तेमाल करने और सुरक्षित यौन संबंध बनाने की सलाह दी है।

सुपरबग जैसी बड़ी समस्या हमारे सामने होगी जो ‘हेल्थ इमरजेंसी’ से कम नहीं होगी

पैडी हॉर्नर एमजी की रोकथाम के लिए नए दिशा-निर्देश लिखने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देश इसलिए जारी किए गए हैं क्योंकि 15 साल पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकता। अगर हम पुराना तरीका अपनाते रहे तो इसमें कोई शक़ नहीं है कि सुपरबग जैसी बड़ी समस्या हमारे सामने होगी जो ‘हेल्थ इमरजेंसी’ से कम नहीं होगी।

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