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कांग्रेस काल में जनता की मजदूरी लूट का श्रोत था मनरेगा: केशव मौर्य

Keshav Maurya

Keshav Maurya

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन तथा भारत सरकार के ग्राम्य विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में देश में वी-बी-जी-राम-जी योजना लागू की गई है। यह योजना ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास, रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के निर्माण तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी पहल सिद्ध होगी।

उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धरातल पर ऐसी योजनाएं लागू कर रहे हैं, जिनका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आज के प्रयास विकसित भारत के निर्माण में सफल एवं दूरगामी परिणाम देंगे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण योजना के लिए प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय ग्राम्य विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

श्री मौर्य ने कहा कि इस योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके गांव के निकट सम्मानजनक एवं स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय में वृद्धि होगी तथा पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी। इसके साथ ही विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना एवं स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा तथा विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी अभिसरण सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि योजना के प्रभावी संचालन हेतु उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री तथा उपाध्यक्ष ग्रामीण विकास मंत्री होंगे। परिषद में वित्त, राजस्व, वन, सिंचाई एवं जल संसाधन, लोक निर्माण, कृषि, नियोजन, पंचायती राज, विधि, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति, ग्रामीण अभियंत्रण, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य पालन, सहकारिता, समाज कल्याण तथा श्रम विभाग के मंत्री सदस्य होंगे, जिससे सभी विभागों के समन्वय से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों को इस योजना में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। पात्र परिवारों का पंजीकरण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करना, रोजगार के आवेदन प्राप्त करना, विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करना, ग्राम सभा एवं वार्ड सभा की अनुशंसाओं के आधार पर वार्षिक कार्ययोजना बनाना, रोजगार का आवंटन तथा स्वीकृत कार्यों का तकनीकी मानकों के अनुरूप क्रियान्वयन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाएगा। योजना के अंतर्गत कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक पात्र परिवार को आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किया जाएगा। प्रत्येक कार्ड का एक विशिष्ट (यूनिक) नंबर होगा तथा उसमें परिवार के वयस्क सदस्यों का विवरण, फोटो, बैंक अथवा डाकघर खाते की जानकारी, बीमा संबंधी विवरण एवं उपलब्ध होने पर आधार संख्या अंकित होगी। कार्ड की वैधता तीन वर्ष होगी तथा सत्यापन के बाद उसका नवीनीकरण किया जाएगा।

श्री मौर्य ने कहा कि कार्ड में रोजगार की मांग, आवंटित कार्य दिवस, कार्य का विवरण, मस्टर रोल, मजदूरी भुगतान, विलम्ब मुआवजा, बेरोजगारी भत्ता तथा निर्मित परिसंपत्तियों का पूरा विवरण दर्ज रहेगा, जिससे प्रत्येक लाभार्थी को पूर्ण पारदर्शिता प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि योजना की सबसे बड़ी विशेषता रोजगार और मजदूरी की कानूनी गारंटी है। प्रत्येक पात्र परिवार को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा। मजदूरी का भुगतान निर्धारित दरों पर अधिकतम 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो बेरोजगारी भत्ता देय होगा तथा यदि मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं होता है तो श्रमिकों को प्रतिदिन 0-05 प्रतिशत की दर से विलम्ब मुआवजा दिया जाएगा। प्रत्येक श्रमिक को शिकायत दर्ज कराने का भी पूर्ण अधिकार होगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपी) विकसित भारत-2047 के विजन पर आधारित स्थानीय विकास योजना होगी, जिसे ग्राम पंचायतें सहभागितापूर्ण एवं साक्ष्य आधारित प्रक्रिया से तैयार करेंगी। इसमें जीआईएस आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म तथा अन्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाओं का उपयोग किया जाएगा। ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जाएगा तथा विभिन्न केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से ग्राम पंचायतों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि योजना की प्रमुख विशेषताओं में मांग आधारित रोजगार, रोजगार की कानूनी गारंटी, समयबद्ध मजदूरी भुगतान, डिजिटल एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली, ग्राम सभा की सक्रिय सहभागिता, सामाजिक अंकेक्षण, जवाबदेही, ग्रामीण आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पलायन में कमी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना शामिल है।

श्री मौर्य ने बताया कि योजना में डिजिटल एवं पारदर्शी व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अंतर्गत बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस आधारित कार्यस्थल निगरानी, ऑनलाइन एमआईएस, सार्वजनिक सूचना प्रणाली, जियो-टैगिंग तथा डिजिटल मस्टर रोल की व्यवस्था होगी। जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका एवं कृषि आधारित अवसंरचना तथा आपदा एवं जलवायु परिवर्तन से संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण को ध्यान में रखते हुए कम से कम एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएं होंगी। एकल महिलाओं, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर तथा अन्य कमजोर वर्गों को विशेष रोजगार गारंटी कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे तथा उन्हें रोजगार आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि योजना के अंतर्गत अधिकांश कार्य सीधे ग्राम पंचायतों एवं अधिकृत कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से कराए जाएंगे तथा ठेकेदारों की भूमिका पर प्रभावी प्रतिबंध रहेगा। श्रम आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर ग्रामीण श्रमिकों को अधिकाधिक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वी-बी-जी-राम-जी योजना ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली योजना सिद्ध होगी। इससे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अंत में केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मनरेगा जैसी योजनाएं केवल जनता की मजदूरी की लूट का एक बड़ा स्रोत बनकर रह गई थीं। पूर्ववर्ती सरकारों में भ्रष्टाचार और बिचौलियों का ऐसा तंत्र हावी था कि गरीब मजदूरों के हक का पैसा सीधे उनके हाथों तक पहुंचने के बजाय चंद भ्रष्ट लोगों की जेबों में चला जाता था।

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