इस साल भी इलाहाबाद में नहीं निकलेगा मोहर्रम का जुलूस, ये है वजह

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इलाहाबाद।  शहर की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे और उनकी खतरनाक हालत देखते हुए ताजियादारों ने इस बार मोहर्रम का जुलूस न निकालने का फैसला किया है। इलाहाबाद के दूर-दराज के गांव नहीं, बल्कि शहरी इलाके की सड़कों का भी हाल इतना बदहाल हैं कि उन पर चलना खतरे से खाली नहीं है। यहां की सड़कों पर बड़े- बड़े गड्ढे और उन पर पानी भरे होने से तमाम लोग आए दिन हादसे का शिकार होते रहते हैं। सडकों की इसी बदहाली की वजह से मोहर्रम कमेटियों ने इस बार किसी तरह का कोई जुलूस न निकालने का ऐलान कर दिया है।

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ताजिये के साथ चलने वाले लोग नंगे पैर सड़कों पर चलते हैं 

शहर की लगभग सभी सड़कें कुंभ के निर्माण कार्यों के चलते खुदी हुई हैं। जिससे नंगे पांव निकाले जाने वाले मोहर्रम के जुलूस के लिए ये सड़कें मुसीबत बन गई है। ताजियादारों का कहना है कि शहर में निकाले जाने वाले जुलूसों में ताजिये के दीदार और उसे कांधा देने के लिए तकरीबन एक लाख की भीड़ जुटती है। वहीं ताजिये के साथ चलने वाले लोग नंगे पैर सड़कों पर चलते हैं।

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कोई भी हादसा होने की सूरत में इतनी बड़ी भीड़ को संभाल पाना आसान नहीं

सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से उस पर भीड़ का चलना लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं होगा और किसी भी हादसे की आशंका से इंकार भी नहीं किया जा सकता। ताजियादारों का यह भी मानना है कि कोई भी हादसा होने की सूरत में इतनी बड़ी भीड़ को संभाल पाना आसान नहीं होगा। इसीलिए किसी हंगामे या विवाद की आशंका से बचने के लिए ताजियादारों ने इस बार नवीं और दसवीं को कोई भी जुलूस निकालने से साफ मना कर दिया है।

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लगातार चौथे  साल इलाहाबाद की सड़कों पर नहीं निकलेगा मोहर्रम के जुलूस

आपको बता दें की यह लगातार चौथा साल है, जब इलाहाबाद की सड़कों पर मोहर्रम के जुलूस नहीं निकाले जाएंगे। बता दें कि पिछले तीन सालों से दशहरा और मोहर्रम के एक साथ पड़ने की वजह से ताजिये- अलम और मेहंदी के जुलूस नहीं निकाले गए थे। इस बार सड़कें खराब होने से जुलूस नहीं निकाले जाने का फैसला किया गया है।

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मोहर्रम का जुलूल न निकालने के पीछे हिन्दू मुस्लिम एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना

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हालांकि अफसरों ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि वह वैकल्पिक इंतजामात  करने की कवायद में जुटे हुए थे, लेकिन अब सद्भावना के साथ किये गए फैसले का वे भी सम्मान करते हैं। लेकिन बता दें की मोहर्रम का जुलूल न निकालने के पीछे एक मकसद और छिपा है वो है हिन्दू मुस्लिम एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना। ताकि कोई भी असामाजिक तत्व शहर की फिजा में जहर न घोलकर और न ही अमन चैन को बिगाड़ सके।

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