Mood Swings in Pregnancy: प्रेग्नेंसी के दौरान अपने मूड स्विंग्स न करें

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लाइफस्टाइल डेस्क। प्रेग्नेंसी होना तो आम बात है लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत सी बातोँ का ध्यान रखना पड़ता हैं। जैसे प्रेग्नेंसी के दौरान मूड स्विंग्स होना बेहद आम है, पर इसे कंट्रोल करना जरूरी है। नहीं तो इसका असर आपके होने वाले बच्चे पर पड़ सकता है। गर्भावस्था भावनात्मक उतार-चढ़ाव से भरी होती है।

हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव, शरीर में शारीरिक परिवर्तन, थकान, शारीरिक परेशानी, आपके चयापचय में बदलाव और मातृत्व की प्रत्याशा आपकी भावनाओं पर रह-रह कर प्रभावित कर सकती है। इसलिए, अगर आप गर्भवती हैं और मिजाज में बार-बार बदलाव का अनुभव कर रही हैं, तो आप ऐसा महसूस कर रही है को आप अकेली नहीं है।

गर्भवती महिलाओं को आमतौर पर 6 से 10 सप्ताह के बीच पहली तिमाही के दौरान मूड स्विंग्स का अनुभव होता है और फिर तीसरी तिमाही में फिर से शरीर में थोड़े बड़े बदलावों के साथ आता है। मड स्विंग्स में अचानक कभी भूख लग जाती है, तो कभी किसी बात पर गुस्सा आ जाता है। यहां तक कि कई महिलाएं इन दौरान छोटी-छोटी बातों पर रोने भी लगती हैं। ऐसे में कुछ तरीके हैं, जिनकी मदद से आप गर्भावस्था के दौरान अपने मूड को स्थिर रखने के लिए अपना सकते हैं।

पूरी नींद लें

एक अच्छी और पूरी नींद लेना गर्भावस्था के दौरान भी उतना ही जरूरी है, जितना आम दिनों में। गुणवत्तापूर्ण नींद लेना आपके शरीर को जन्म के लिए तैयार करने में मदद करता है। साथ ही एक अच्छी नींद शिशु को गर्भावस्था के मनोवैज्ञानिक तनावों से भी बचाता है। दूसरी ओर, गर्भावस्था के दौरान नींद की कमी से प्रीक्लेम्पसिया सहित कई जटिलताएं को पैदा कर सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रेग्नेंसी के वक्त आम खाने के साथ-साथ आराम और नींद का भी खास ख्याल रखें।

नियमित शारीरिक प्रक्रिया करें

यहां तक कि 10 मिनट भी पैदल चलना आपकी प्रेग्नेंसी को थोड़ा आसान बना सकती है। व्यायाम मस्तिष्क को सेरोटोनिन, फील-गुड केमिकल जारी करने के लिए उत्तेजित करता है और तनाव और परेशानी से राहत दिलाने में मदद करता है। कोमल व्यायाम के लिए विकल्प, जैसे चलना या तैरना आदि है। प्रसव पूर्व योगा करना नींद में सुधार, तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए कोशिश करें कि पूरे प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधियां करते रहें।

अच्छा खाएं-पिएं

गर्भावस्था के दौरान, आपके शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताएं बढ़ जाती हैं। एक खराब आहार या निम्न रक्तचाप आपको उदास बना सकता है। छोटे, नियमित और स्वस्थ स्नैक्स खाने से आपके मूड स्विंग्स को ठीक करने में मदद मिल सकती है। वहीं पानी की कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन और अवसाद पैदा होने का डर रहता है। इसलिए इस दौरान भी खूब पानी पिएं। अगर आप सादे स्वाद वाले खाने को पसंद नहीं कर रहे हैं, तो आप हर्बल चाय, और ताजे फल और सब्जियों के रस के साथ अपने शरीर की तरल आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं।

अपने पसंद का ही काम करें

अपने पसंद का काम करने के की खास बात ये होती है कि ऐसे करने में आप खुश रहते हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसा करें जो गर्भावस्था के उन सभी विचारों को मन में आने से रोके, जो आपको परेशान कर सकता है। वहीं गर्भावस्था के दौरन अपने मन के काम में लगे रहने से मूड स्विंग्स में कमी आ सकती है। जब आप लो महसूस कर रहे हों, तो दोस्तों के साथ मूवी देखने जाएं, पेंट करें या कुछ ड्रॉ करें। आप जिस जगह से प्यार करते हैं, वहां जाएं या सिर्फ म्यूजित सुनें, जो आपको अच्छा महसूस करवाए।

खुल कर हंसें

हंसने से आपके दिमाग में फील-गुड केमिकल्स रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम करता है। इस तरह आप तनावमुक्त महसूस करते हैं। हंसना आपकी मांसपेशियों को शांत कर सकता है और आपको सकारात्मक महसूस करने में मदद कर सकता है। अध्ययन कहते हैं कि जब बच्चे अपनी मां को खुश तो उनका विकास और बेहतर होता हैं। इसलिए भी कहा जाती है कि प्रेग्नेंसी के वक्त मां को ज्यादा से ज्यादा खुश रहना चाहिए।

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