करवा चौथ : अस्त रहेगा शुक्र, चांद की पूजा को मिलेगा 1 घंटे 7 मिनट का समय 

- in धर्म

इस बार पर्व के दौरान शुक्र अस्त रहेगा। शुक्र अस्त के दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस बार शुक्र अस्त 16 अक्टूबर को 5 बजकर 53 मिनट पर पश्चिम में हो गया है। इससे पूजा-पाठ, व्रत-उपवास में कोई बाधा नहीं होती है लेकिन व्रत का उद्यापन नहीं किया जा सकता ।

करवा चौथ शनिवार 27 अक्टूबर 2018 को है। पूजा का मुहुर्त करीब सवा घंटे तक बना रहेगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखने के बाद चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा निभाती हैं। महिलाएं चांद देखने तक जल भी नहीं ग्रहण करतीं। इस दिन बनाया जानाे वाला भोजन भी विशिष्ट होता है। इस बार करवा चौथ पूजा का मुहूर्त 17.40 से 18.47 बजे तक माना गया है। आम तौर पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला रहती हैं। दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा में पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।
ज्योतिर्विद उमेश शास्त्री के मुताबिक इस बार करवा चौथ का मुहूर्त 17.40 से 18.47 बजे तक है। चांद की पूजा करने के लिए महिलाओं को करीब 1 घंटे 7 मिनट का समय मिलेगा।

पढ़े:- चोरों का आतंक, मॉडल शॉप का पिछला दरवाजा तोड़कर लाखों की चोरी

करवा चौथ के चंद्रोदय समय 19.55 बजे है। उन्होंने बताया कि यह पर्व उत्तर भारत के करीब-करीब सभी राज्यों में मनाया जाता है। पंजाब में इस त्योहार की शुरुआत सर्गी के साथ होती है। सर्गी सास तैयार करती हैं। उसे ही खाकर बहू करवा चौथ का व्रत रखती है। शाम को 16 श्रृंगार कर के शुभ मुहूर्त में पूजा करती हैं। करवा चौथ की कथा सुनती हैं। इस पूजा को समूह में सम्पन्न किया जाता है। महिलाएं एक दूसरे को अपनी पूजा की थाली देती हैं घेरा पूरा करती हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इस दिन गौर माता की पूजा की जाती है। उनकी प्रतिमा गाय के गोबर से तैयार की जाती है।

इस बार करवा चौथ का मुहूर्त 17.40 से 18.47 बजे तक है। चांद की पूजा करने के लिए महिलाओं को करीब 1 घंटे 7 मिनट का समय मिलेगा। ज्योतिषीय गणना के हिसाब से करवा चौथ के चंद्रोदय समय 19.55 बजे है। उन्होंने बताया कि यह पर्व उत्तर भारत के करीब-करीब सभी राज्यों में मनाया जाता है। पंजाब में इस त्योहार की शुरुआत सर्गी के साथ होती है। सर्गी सास तैयार करती हैं। उसे ही खाकर बहू करवा चौथ का व्रत रखती है। शाम को 16 श्रृंगार कर के शुभ मुहूर्त में पूजा करती हैं। करवा चौथ की कथा सुनती हैं। इस पूजा को समूह में सम्पन्न किया जाता है। महिलाएं एक दूसरे को अपनी पूजा की थाली देती हैं घेरा पूरा करती हैं। उत्तर प्रदेश और राजस्थान में इस दिन गौर माता की पूजा की जाती है। उनकी प्रतिमा गाय के गोबर से तैयार की जाती है।

loading...
Loading...

You may also like

छठ पूजा के दूसरे दिन होता है लोहंडा और खरना

चार दिन तक चलने वाले महापर्व छठ की