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भारत-पाक संवाद की मांग तेज, 100 से ज्यादा हस्तियों का PM मोदी को पत्र

PM Modi

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नई दिल्ली/श्रीनगर। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने पर भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से शांति बहाली के लिए एक संयुक्त अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों और संवाद को फिर से शुरू करने का पुरजोर आग्रह किया है।

इस संयुक्त पहल को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती का भी मजबूत समर्थन मिला है। महबूबा मुफ्ती ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखे जाने के इस कदम की सराहना की है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से हाल ही में द्विपक्षीय बातचीत के समर्थन में आई टिप्पणियों का स्वागत किया।

वरिष्ठ आरएसएस नेताओं के बयानों का दिया हवाला

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयानों का विशेष रूप से हवाला दिया। मुफ्ती ने कहा कि जब आरएसएस जैसे संगठन के शीर्ष नेता पाकिस्तान से बातचीत की वकालत कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जम्मू-कश्मीर मुद्दे को संवाद के जरिए सुलझाने का यह ऐतिहासिक अवसर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन ‘आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं’ को दोहराते हुए कहा कि LoC और LAC पर बातचीत करने, सीमाएं खोलने और जम्मू-कश्मीर को शांति का पुल बनाने से पूरे दक्षिण और मध्य एशिया में आर्थिक समृद्धि का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

भारतीय जनता पार्टी ने जताई कड़ी आपत्ति

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस संयुक्त पत्र और बातचीत की मांग की तीखी आलोचना की है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने इस आह्वान को पूरी तरह गलत ठहराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस समय जब सीमा पार से होने वाला आतंकवाद लगातार कम हो रहा है, पाकिस्तान से किसी भी तरह की बातचीत का समय बिल्कुल उचित नहीं है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक जुड़ाव या बातचीत का मामला पूरी तरह से भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उन्होंने ऐसे बयानों को निंदनीय बताते हुए कहा कि देश की आने वाली पीढ़ियां ऐसे आत्मघाती कदमों को कभी माफ नहीं करेंगी।

दोनों देशों की इन प्रमुख हस्तियों ने किए हस्ताक्षर

‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ द्वारा जारी की गई इस संयुक्त अपील पर दोनों देशों के कुल 117 प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 नागरिक शामिल हैं। पत्र में रेखांकित किया गया है कि दोनों देश मिलकर दुनिया की लगभग एक-पांचवें मानव आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो दशकों की शत्रुता के कारण सुरक्षित भविष्य और समृद्धि से वंचित हैं।

  • भारतीय हस्ताक्षरकर्ता: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा और पूर्व टीएमसी मंत्री व वर्तमान एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर।

  • पाकिस्तानी हस्ताक्षरकर्ता: पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व वरिष्ठ राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, नेशनल असेंबली के सदस्य इस्फान्यार भंडारा और प्रसिद्ध परमाणु भौतिक विज्ञानी परवेज हुदभोय।

संबंध सुधारने के लिए सुझाए गए प्रमुख उपाय

दोनों देशों के प्रबुद्ध नागरिकों ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच वर्षों से जमी बर्फ को पिघलाने और विश्वास बहाली (Confidence Building Measures) के लिए कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। उन्होंने दोनों राजधानियों में पूर्णकालिक उच्चायुक्तों (High Commissioners) की तत्काल नियुक्ति कर पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने की मांग की है। इसके अलावा सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने, वाणिज्यिक उड़ानों के लिए दोनों देशों के हवाई क्षेत्र (Airspace) को खोलने और ऐतिहासिक अटारी-वाघा भूमि सीमा को व्यापार व आम जनता की यात्रा के लिए दोबारा सक्रिय करने का अनुरोध किया गया है। पत्र में श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा जैसी सीमा पार संपर्क पहलों को पुनर्जीवित करने पर भी बल दिया गया है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर सहित सभी लंबित विवादों पर 2004 से 2007 के बीच तैयार किए गए द्विपक्षीय ढांचे के आधार पर व्यापक संवाद शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सीमाओं के विसैन्यीकरण (Demilitarization) और तनाव को कम करने की आवश्यकता जताई है। इसके साथ ही, सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पूरी तरह खोलने और पाकिस्तान की नीलम घाटी में स्थित ऐतिहासिक शारदा पीठ तक भारतीय श्रद्धालुओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने का भी विशेष आग्रह किया गया है।

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