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मुकेश खन्ना ने कहा- युवाओं में अश्लीलता और बेहूदगी घुसती जा रही है

नई दिल्ली। सोशल मीडिया का युवाओं में काफी क्रेज है। लोग टिकटॉक, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और बाकी के प्लैटफॉर्म के बीच बंटे हुए हैं। टिकटॉक स्टार फैजल सिद्दीकी के ‘एसिड अटैक’ को बढ़ावा देने वाले वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच जंग छिड़ गई है। टिकटॉक की रेटिंग में भी गिरावट देखने को मिली है।

इस ऐप के इस्टेमाल पर कई बॉलीवुड सेलेब्स ने रोक लगाने की मांग की है। और अब मुकेश खन्ना का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो चुका है। मुकेश खन्ना ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह इस ऐप के यूजर्स को लताड़ते नजर आ रहे हैं।

मुकेश खन्ना कहते हैं कि इस ऐप पर समय बिताने के अलावा हमारी जिंदगी में बहुत कुछ है करने के लिए। मैं खुश हूं कि चाइना का यह वायरस (यानी की यह ऐप) हमारे देश से बाहर निकल रहा है और इसकी रेटिंग 4.5 से 1.3 रह गई है। मैं खुश हूं कि लोग इस ऐप से अपने अकाउंट डिलीट कर रहे हैं। युवाओं को नष्ट होने से बचाने के लिए इस कैंपेन से जुड़िए।

 

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टिक टोक टिक टोक घड़ी में सुनना सुहावना लगता है। लेकिन आज की युवा पीढ़ी का घर मोहल्ले सड़क चौराहे पर चंद पलों की फ़ेम पाने के लिए सुर बेसुर में टिक टोक करना बेहुदगी का पिटारा लगता है।कोरोना चायनीज़ वाइरस है ये सब जान चुके हैं।पर टिक टोक भी उसी बिरादरी का है ये भी जानना ज़रूरी है। टिक टोक फ़ालतू लोगों का काम है।और ये उन्हें और भी फ़ालतू बनाता चला जा रहा है।अश्लीलता, बेहुदगी, फूहड़ता घुसती चली जा रही है आज के युवाओं में इन बेक़ाबू बने विडीओज़ के माध्यम से। इसका बंद होना ज़रूरी है।ख़ुशी है मुझे कि इसे बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।मैं इस मुहिम के साथ हूँ।

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मुकेश लिखते हैं कि टिकटोक-टिकटोक घड़ी में सुनना सुहावना लगता है। लेकिन आज की युवा पीढ़ी का घर-मोहल्ले-सड़क-चौराहे पर चंद पलों की फ़ेम पाने के लिए सुर-बेसुर में टिकटोक करना बेहुदगी का पिटारा लगता है। कोरोना चायनीज़ वाइरस है ये सब जान चुके हैं। पर टिकटोक भी उसी बिरादरी का है ये भी जानना ज़रूरी है।

टिकटोक फ़ालतू लोगों का काम है। और ये उन्हें और भी फ़ालतू बनाता चला जा रहा है। अश्लीलता, बेहुदगी, फूहड़ता घुसती चली जा रही है आज के युवाओं में इन बेक़ाबू बने वीडियोज़ के माध्यम से। इसका बंद होना ज़रूरी है। ख़ुशी है मुझे कि इसे बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। मैं इस मुहिम के साथ हूं।

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