डीजी होमगार्ड : जिसकी मूंछों में दम…वही है सिंघम, योगी पर भी सवाल

डीजी होमगार्ड
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रोहित सिंह 

लखनऊ। यूपी की सत्ता में आयी योगी सरकार अपने फैसलों से चर्चा और विवादों का कारण बनी हुई है। एक बार फिर योगी सरकार के मंत्रियों व अफसरों का फरमान विवाद का कारण बन गया है। वहीं अफसरों के बेतुके फरमान सरकार की छवि पर भी सवालिया निशान उठा रहे हैं। दरअसल डीजी होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला के पत्र ने पूरे महकमे में हलचल मचा रखी है। उनके द्वारा जारी एक पत्र में कहा गया है कि होमगार्ड विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अवैतनिक अधिकारियों, होमगार्ड्स स्वयं सेवकों को ‘अच्छी ‘मूंछों’ पर पुरस्कार दिया जायेगा। वहीं उनके इस फैसले से जहां बिना मूंछ वाले अफसर शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं। वहीं मूंछों वाले अपनी मूंछों पर ताव देते नहीं थक रहे।

डीजी होमगार्ड ने 8 जनवरी को जारी किया पत्र

  • डीजी होमगार्ड ने अपने बेतुके पत्र में लिखा कि अधिकारियों और कर्मचारियों आदि को फील्ड में कई ऐसी सेवायें करनी पड़ती है।
  • इस दौरान उनके अच्छे, प्रभावशाली एवं रोबिले व्यक्तित्व के कारण अपने काम को करने में सहूलियत होती है।
  • जिससे आम लोगों में उनके प्रति सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • मूंछों से विशेष रूप से शांति व्यवस्था एवं ट्रैफिक आदि के जवानों को कार्यस्थल पर इससे विशेष सहायता मिलती है।
  • इसलिए अधिकारियों और जवानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चुना गया है।
  • जिन्हें सम्मानित किये जाने के लिए 20 जनवरी को आमंत्रित किया जा रहा है।
  • वहीं ये भी कहा गया कि ऐसे जवान जिनकी मूंछे उनके कार्य में सहायक हो वो अपनी नियुक्ति के स्थान व फोटोग्राफ भेजें।
  • जिससे उन्हें सम्मानित किये जाने के लिए विचार किया जा सके।

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क्या बिना मूंछों वाले अफसर योग्य नहीं ?

  • डीजी होमगार्ड सुनाये गये इस फरमान के बाद एक बहस छिड़ गयी है।
  • सवाल उठ रहे हैं कि बिना मूंछ वाले अफसरों में योग्यता नहीं होती है?
  • क्या मूंछ रख लेने से कर्मचारियों और अफसरों की योग्यताएं बढ़ जाती हैं?
  • वहीं बिना मूंछ वाले अफसरों को इस तरह से तिरस्कृत करना सही है?
  • क्या मूंछ वाले अफसरों को प्रात्साहित करने के चक्कर में दूसरे अफसर जो अपने काम में कुशल हैं।
  • उन्हें हतोत्साहित नहीं किया जा रहा?
  • वहीं हमारे सीएम योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री राजनाथ सिंह की भी मूंछे नहीं है।
  • तो क्या इसका मतलब वे बिना काबिलियत के इतने सम्मानित पदों पर आसीन हैं?
  • सवाल बहुत हैं लेकिन शायद इसके जवाब ऐसे बेतुके फरमान जारी करने वाले अफसरों के पास नहीं है।

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विभाग में कई बड़े अफसर जिनकी नहीं हैं मूंछे

  • इस मूंछ पर छिड़ी बहस ने कई सवाल उठा दिए हैं।
  • विभाग में पहले से ही इलाहाबाद के डीआईजी एस सी उपाध्याय की मूंछे नही हैं।
  • वहीं बस्ती के मंडलीय कमांडेंट ए के त्रिपाठी, गोरखपुर के मंडलीय कमांडेंट अजय कुमार पाण्डेय, कन्नौज के कमांडेंट चंदन सिंह,
  • अमरोहा के कमांडेंट मनीष दूबे, मंडलीय कमांडेंट, लखनऊ विवेक सिंह, मंडलीय कमांडेंट,कानपुर सुरेन्द्र कुमार बिना मूंछ वाले अधिकारी हैं।
  • इसी क्रम में जितने भी नये कमांडेंट बने हैं उनमें से आधे से ज्यादा ‘बिना मूंछ’ वाले हैं।
  • तो क्या इसका मतलब यह है कि ये अधिकारी अपना जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभा पा रहे हैं?
  • क्या इनकी छवि जनता के बीच अच्छी नही है या उनके पास योग्यता नहीं है?
  • यूपी होमगार्ड विभाग में वर्त्तमान समय में मंडलीय कमांडेंट, जिला कमांडेंट से लेकर इंस्पेक्टर की तादात सैंकड़ों में है।
  • वहीं हाल ही होमगार्ड मंत्री अनिल राजभर ने मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।
  • जिसमें होमगार्ड तपन मंडल को राष्ट्रपति से स्वीकृत वर्ष 2016के गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया था।
  • चूंकि तपन मंडल का मूंछ नहीं है तो मंत्री जी को उस जवान का सम्मान करने के बजाये तिरस्कार कर देना चाहिए।
  • विडम्बना तो इस बात की है कि मंत्री हो या अफसर यूपी में भ्रष्टाचार ख़त्म करने की जगह पर इन बेतुके फरमान सुना रहे है।
  • अगर यूपी में ऊंचे पदों पर आसीन मंत्रियों और अफसरों की बुद्धि नहीं खुली तो भ्रष्टाचार मुक्त यूपी का सपना नामुमकिन है।
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