पाक के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़की की मौत के बाद सोशल मीडिया पर आक्रोश, उठी इंसाफ की मांग

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  • लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज की फाइनल इयर की छात्रा निम्रिता चांदनी का हॉस्टल के कमरे में मिला था शव
  • पुलिस अभी जांच कर रही है कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का, परिजनों का आरोप, सूइसाइड नहीं मर्डर
  • सिंध प्रांत के उसी घोटकी जिले की रहने वाली थीं निम्रिता जहां कुछ दिन पहले भीड़ ने मंदिरों और हिंदुओं के घरों में की थी तोड़फोड़

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़की निम्रिता की मौत के बाद उसके लिए इंसाफ की मांग जोर पकड़ रही है। वहां सोशल मीडिया साइट पर जस्टिस फॉर निम्रिता ट्रेंड कर रहा है। पुलिस अभी जांच कर रही है कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का। हालांकि, जिस हालात में लड़की की मौत हुई, उसे लेकर सोशल मीडिया पर तमाम पाकिस्तानी उसे हत्या बता रहे हैं और निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के जरिए लड़की के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं। ट्विटर पर इस पूरे मामले को जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक उत्पीड़न की घटनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। कुछ भारतीय यूजर्स तो पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली मलाला की चुप्पी पर भी सवाल उठा रहे हैं। आइए बताते हैं कि कौन थीं निम्रिता और उनकी मौत से क्यों कटघरे में है पाकिस्तान।
कौन थीं निम्रिता
सिंध के घोटकी जिले की रहने वाली निम्रिता चांदनी लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज में फाइनल इयर की स्टूडेंट थीं। उनकी मौत के बाद घोटकी में हिंदू समुदाय ने मंगलवार को अपनी दुकानें बंद कर विरोध दर्ज कराया। बता दें कि घोटकी जिले में ही कुछ दिन पहले भीड़ ने ईश निंदा के आरोप में एक स्कूल के हिंदू प्रिंसिपल की पिटाई की थी। भीड़ ने 3 मंदिरों, स्कूल और हिंदुओं के कई घरों में तोड़फोड़ की थी।

हत्या या आत्महत्या?
सोमवार को लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज की छात्रा निम्रिता चांदनी का शव उनके हॉस्टल के कमरे में चारपाई से बंधा हुआ पाया गया था। पुलिस ने उसके कमरे से उसके मोबाइल और अन्य सामानों को कब्जे में लेकर फरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का।

परिजनों का आरोप, निम्रिता की नृशंस हत्या हुई
निम्रिता के परिजनों का आरोप है कि जिन परिस्थितियों में शव मिला और उस पर जिस तरह के निशान मिले, उससे जाहिर होता है कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई है। परिजनों ने पुलिस की जांच पर भी सवाल उठाए हैं। निम्रिता के भाई विशाल ने, जो खुद कराची के एक मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं, अपनी बहन की मौत को नृशंस हत्या करार दिया है। उन्होंने कहा, ‘उसकी शव पर कई जगहों पर चोट के निशान हैं। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने उसे पकड़ रखा था। हम अल्पसंख्यक हैं और प्लीज हमारी मदद के लिए खड़े हों।’ निम्रिता के चाचा ने उसके शव को चंदका मेडिकल कॉलेज (CMC) ले जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पूछा कि शव का पोस्टमॉर्टम करने के बजाय CMC के आईसीयू में क्यों रखा गया।

क्या कहना है पुलिस का?
पुलिस ने पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। मामले में FIR तक दर्ज नहीं की गई है। इस बीच पीपीपी लीडर निसार खुसरो ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम हो चुका है और उसकी रिपोर्ट से पता चलेगा कि मामला आत्महत्या का है या फिर मर्डर का। उन्होंने कहा कि पुलिस हर ऐंगल से जांच कर रही है।

निम्रिता की मौत से सोशल मीडिया पर आक्रोश
निम्रिता की मौत के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त आक्रोश दिख रहा है। पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर समेत कई सिलेब्रिटी और आम ट्विटर यूजर्स ने निम्रिता के लिए इंसाफ की मांग की है।

NBT

इस मौत को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ट्विटर पर कुछ भारतीयों ने मलाला की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। बता दें कि मलाला ने जम्मू-कश्मीर में लोगों के कथित उत्पीड़न पर कई ट्वीट किए थे। एक ट्वीट में उन्होंने एक कश्मीरी लड़की के दर्द का इजहार किया था जो 12 अगस्त को स्कूल नहीं जा पाई और एग्जाम नहीं दे सकी थी। इसके बाद, ट्विटर यूजर्स ने उन पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया क्योंकि 12 अगस्त को बकरीद था और उस दिन स्कूलों में छुट्टियां थीं।

Manjinder S Sirsa

Dear @Malala Ji, why don’t I see your tweet on

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अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न, अत्याचार से कटघरे में पाकिस्तान

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं, ईसाइयों, अहमदियों, सिखों आदि के उत्पीड़न की घटनाएं कोई नई बात नहीं है। हाल के दिनों में कुछ सिख और हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और शादी के मामले सुर्खियों में रहे थे। निम्रिता जिस घोटकी जिले की रहने वाली थीं, वहीं पर हाल में ईश निंदा के आरोप में भीड़ ने मंदिरों और हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ कर तांडव मचाया था। पाकिस्तान में कम से कम 17 ऐसे लोग हैं, जिन्हें ईश निंदा का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई है। इनमें से ज्यादातर धार्मिक अल्पसंख्यक हैं।

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