बकरीद (ईद-उल-अजहा) (Bakrid) का त्योहार आते ही आमतौर पर बाजारों में बकरों की नस्ल, उनके वजन और उनकी कीमतों को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश के आगरा में एक मुस्लिम परिवार ने इस पारंपरिक कहानी को एक बिल्कुल नया और अनोखा मोड़ दे दिया है। यहाँ बकरीद (Bakrid) से ठीक पहले एक परिवार ने जीवंत बकरे की कुर्बानी देने के बजाय बकरे की आकृति (तस्वीर) वाला केक काटकर त्योहार मनाया। अब इस अनोखे जश्न की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं, जिसे लोग बकरीद का सबसे अनूठा और सकारात्मक संदेश बता रहे हैं।
दिखावे के खिलाफ एडवोकेट गुल चमन शेरवानी की पहल:
यह दिलचस्प मामला आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तिरंगा मंजिल शेरवानी मार्ग का है। यहाँ रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता (एडवोकेट) गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने अपने घर पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया था। शेरवानी परिवार बाकायदा बकरे के डिजाइन वाला एक बड़ा केक लेकर आया और परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर उसे काटा। इस लीक से हटकर की गई पहल के पीछे परिवार का समाज को एक बहुत बड़ा और गहरा संदेश देना था।
‘दौलत की नुमाइश नहीं, नीयत की बात है कुर्बानी’:
इस अनोखे आयोजन पर बात करते हुए एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने कहा कि अल्लाह को किसी भी तरह का दिखावा या आडंबर पसंद नहीं है, बल्कि वह इंसान की साफ नीयत देखता है। उन्होंने वर्तमान दौर पर तंज कसते हुए कहा कि आज कई लोग कुर्बानी के नाम पर महंगे-महंगे बकरे खरीदकर अपनी दौलत की नुमाइश (दिखावा) करने में लगे हैं, जो कि गलत है। शेरवानी के अनुसार: “असली कुर्बानी किसी बेजुबान जानवर की जान लेने में नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, लालच, नफरत, स्वार्थ और अहंकार को हमेशा के लिए छोड़ देने में है। अगर नीयत सच्ची हो, तो एक भीख मांगकर गुजारा करने वाला गरीब इंसान भी अल्लाह की राह में सबसे बड़ी और असली कुर्बानी दे सकता है।”
हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर की तारीफ:
जैसे ही शाहगंज इलाके में ‘बकरा केक’ काटे जाने की खबर फैली, इस अनूठी पहल को देखने और परिवार का हौसला बढ़ाने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के प्रबुद्ध लोग शेरवानी मार्ग पर स्थित उनके घर पहुंचे। कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी त्योहार का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देना होना चाहिए। इस दौरान शेरवानी परिवार ने आए हुए सभी मेहमानों से अपील की कि आज के समय में समाज को नफरत की नहीं, बल्कि इंसानियत और बेपनाह मोहब्बत के माहौल की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘बकरीद का नया मैसेज’:
घर के भीतर केक काटने और लोगों को संदेश देने का यह वीडियो अब इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। बड़ी संख्या में यूज़र्स इस वीडियो को री-शेयर करते हुए अपनी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई डिजिटल यूज़र्स ने लिखा है कि अगर त्योहारों को रूढ़िवादिता से निकालकर इस तरह लोगों और दिलों को जोड़ने के माध्यम के रूप में मनाया जाए, तो समाज कहीं अधिक बेहतर और खूबसूरत हो सकता है। आगरा के इस परिवार ने साफ कर दिया कि त्याग का असली अर्थ आंतरिक शुद्धता में छिपा है।
