नागेश्वर राव को बड़ा झटका लगा, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया एक लाख का जुर्माना

नागेशवर रावनागेशवर राव

नई दिल्ली।  मुजफ्फरपुर आश्रय गृह के जांच अधिकारी का तबादला करने के मामले में आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। राव पर सख्ती दिखाते हुए अदालत ने उनसे पूछा कि आपने ट्रांसफर से पहले इजाजत क्यों नहीं ली। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूर्व अंतरिम निदेशक को अदालत की अवमानना करने के आरोप में अनोखी सजा सुनाई। उन्होंने नागेशवर राव को कहा कि कोर्ट उठने तक आप कोर्टरुम के कोने में बैठे रहिए।

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आपको बता दें राव ने कहा है कि उन्हें अपनी गलती का अहसास है और उनकी मंशा कोर्ट की अवहेलना करने की कतई नहीं थी।वह इसके बारे में सोच भी नहीं सकते। वह कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगते हैं। उन्हें माफ कर दिया जाए। नागेश्वर राव के अलावा दूसरे अधिकारी एस भासुरन ने भी बिना शर्त माफी मांगी है। दोनों ही अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय की अवमानना में 12 फरवरी को तलब किया है।

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जानकारी के मुताबिक सीबीआई की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल अदालत के सामने पेश हुए और उन्होंने माना कि यह गलतियों की श्रृंखला थी। वेणुगोपाल ने अदालत से कहा कि उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी है और उन्होंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया। अदालत ने राव को कड़ी फटकार लगाई है।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘अदालत के आदेश की अवमानना हुई है। यह उनके (पूर्व अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव) करियर पर एक निशान होगा।’ इसपर वेणुगोपाल ने कहा, ‘उनका 32 सालों का बेदाग करियर रहा है। कृपया उनकी तरफ दयालु दृष्टिकोण को अपनाते हुए माफी को स्वीकार कर लें।’

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