• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

देशभर में कल बंद रहेंगी दवाइयों की दुकानें, केमिस्ट एसोसिएशन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल

Writer D by Writer D
19/05/2026
in Business, Main Slider
0
Medical Store Strike

Medical Store Strike

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

देशभर के मरीजों और आम जनता के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी खबर है। कल यानी 20 मई को पूरे देश में दवाइयों की दुकानें (मेडिकल स्टोर्स) पूरी तरह बंद रहेंगी। दवाओं की दुकानें संभालने वाली देश की सबसे बड़ी संस्था ‘ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट’ (AIOCD) ने एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल (Strike) का आह्वान किया है। इस बड़ी संस्था से देश के करीब 12.4 लाख केमिस्ट, ड्रगिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर जुड़े हुए हैं, जिसके चलते कल देश के कई हिस्सों में जरूरी दवाएं मिलने में गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। एसोसिएशन ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरी दवाएं आज ही खरीद लें ताकि कल किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति या परेशानी से बचा जा सके।

दवा विक्रेताओं की इस देशव्यापी हड़ताल (Strike) का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बेचने वाली ई-फार्मेसी कंपनियां, तुरंत दवा घर पहुंचाने वाले (इंस्टेंट डिलीवरी) ऐप्स, इंटरनेट पर दवाओं की अनियंत्रित बिक्री, भारी-भरकम डिस्काउंट और एआई (AI) द्वारा बनाए जा रहे डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन हैं। केमिस्ट एसोसिएशन का सीधा आरोप है कि सरकार इन ऑनलाइन कंपनियों के संचालन पर ठीक से नजर नहीं रख रही है, जिससे स्थापित नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इस गंभीर मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ही केमिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला किया है। AIOCD ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं, जिसमें उन्होंने नियमों की आड़ बन चुके दो पुराने सरकारी नोटिफिकेशन्स GSR 220(E) और GSR 817(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने को कहा है।

एसोसिएशन का तर्क है कि मौजूदा कानूनी कमियों का फायदा उठाकर ई-फार्मेसी कंपनियां बिना किसी डर या जवाबदेही के काम कर रही हैं। वर्तमान में ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है जो यह तय कर सके कि ये ऑनलाइन कंपनियां डॉक्टरों के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) की प्रामाणिकता की जांच कैसे करेंगी, दवाओं की सुरक्षित डिलीवरी कैसे सुनिश्चित होगी और किसी भी तरह की चिकित्सीय गलती या नकली दवाओं की आपूर्ति होने पर किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा और क्या सजा मिलेगी। AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल ने इस संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स द्वारा गलत या नकली प्रिस्क्रिप्शन पर धड़ल्ले से दवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तकनीक विरोधी नहीं हैं और जानते हैं कि ऑनलाइन फार्मेसी का दौर आ चुका है, लेकिन उन्हें भी उतनी ही सख्ती से रेगुलेट (नियंत्रित) किया जाना चाहिए, जितनी सख्ती से देश की आम और पारंपरिक फार्मेसी को किया जाता है।

दवा विक्रेताओं के विरोध के केंद्र में मौजूद GSR 817(E) दरअसल एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (मसौदा अधिसूचना) है, जिसे करीब 8 साल पहले देश में ई-फार्मेसी के लिए एक विनियामक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। इसमें ऑनलाइन फार्मेसी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, डॉक्टरों के पर्चे की गहन जांच, ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी सजा जैसे कई बेहतरीन प्रस्ताव थे; लेकिन सरकार ने इसे आज तक न तो पूरी तरह लागू किया और न ही आधिकारिक तौर पर रद्द किया। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि सरकार की इस ढुलमुल नीति के कारण बिना किसी स्पष्ट और ठोस कानून के ही ऑनलाइन दवा कंपनियां सालों से एक ‘लीगल ग्रे जोन’ (कानूनी अस्पष्टता) में काम कर रही हैं, और सरकार बार-बार समीक्षा की बात कहकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

वहीं दूसरी ओर, GSR 220(E) की शुरुआत देश में कोरोना महामारी के चरम काल के दौरान की गई थी। उस संकट के समय जब देश भर में लॉकडाउन लगा था और लोग घरों में बंद थे, तब सरकार ने मरीजों की सहूलियत के लिए यह विशेष नियम बनाया था, जिसके तहत पंजीकृत (रजिस्टर्ड) मेडिकल स्टोर्स को लोगों के घरों तक दवाइयां पहुंचाने (होम डिलीवरी) की विशेष छूट दी गई थी। केमिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि यह नियम सिर्फ महामारी के समय की आपातकालीन स्थिति के लिए था, लेकिन इंटरनेट पर दवा बेचने वाली बड़ी कंपनियां आज भी इसी पुराने नियम का फायदा उठाकर बिना किसी सख्त कानून के अपना कारोबार चमका रही हैं। केमिस्ट एसोसिएशन की सरकार से पुरजोर मांग है कि इस पुराने नियम को अब तुरंत खत्म किया जाए और इसकी जगह ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए बिल्कुल नए, पारदर्शी और सख्त नियम बनाए जाएं।

Tags: aiocd protestaiocd strikebreaking newshealth sectorIndia newsMedical Store Strikemedical strikemedicine shopsonline pharmacypharmacy strike
Previous Post

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल को किया 6 माह के लिए जिला बदर

Next Post

रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में आएंगे भारत: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में होंगे शामिल

Writer D

Writer D

Related Posts

Absconded
Main Slider

ये संकेत बताते हैं की आप एकतरफा प्यार

20/05/2026
Diabetes
Main Slider

इन मीठी चीज़ो का लुत्फ़ उठा सकते हैं डायबिटीज के मरीज, शुगर लेवल भी नहीं बढ़ेगा

20/05/2026
bleach
Main Slider

ब्लीच की जलन से मिलेगी राहत, आजमाएं ये उपाय

20/05/2026
CM Dhami
Main Slider

नंदा राजजात और 2027 कुंभ की तैयारी पर CM धामी का फोकस

19/05/2026
Vladimir Putin
Main Slider

रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में आएंगे भारत: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में होंगे शामिल

19/05/2026
Next Post
Vladimir Putin

रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में आएंगे भारत: BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में होंगे शामिल

यह भी पढ़ें

आशुतोष टंडन ने मंडलीय हॉस्पिटल ऑक्सीजन प्लांट का किया निरीक्षण

05/06/2021
suicide

सीएम धामी की सुरक्षा में तैनात कमांडो ने खुद को गोली मारकर की आत्महत्या

01/06/2023
Conversion

श्याम बनकर सलमान ने प्रेम जाल में फंसाया, फिर चाकू की नोंक पर पढ़ाया निकाह

24/11/2022
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version