Site icon 24 GhanteOnline | News in Hindi | Latest हिंदी न्यूज़

कल्पेश्वर धाम में कुदरत का कहर, मलबे में दबा मंदिर परिसर

Kalpeshwar Dham

Kalpeshwar Dham

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में सोमवार रात हुई भारी बारिश ने पंचकेदारों में शामिल कल्पेश्वर महादेव मंदिर (Kalpeshwar Dham) के परिसर में भारी नुकसान पहुंचाया। पहाड़ी से आए मलबे और बरसाती नाले के तेज बहाव से मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा मलबे से पट गया।

मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। श्रद्धालुओं को अब दलदल और मलबे के ऊपर से गुजरकर मंदिर तक पहुंचना पड़ रहा है। मलबे की चपेट में आने से हवन कुंड, रेन शेल्टर, सुरक्षा दीवार और रेलिंग को भी नुकसान पहुंचा है।

मलबे में दबा दानपात्र

मंदिर के पुजारी दर्वान सिंह नेगी के मुताबिक, एक दानपात्र भी मलबे की चपेट में आ गया है। उसमें काफी धनराशि होने की बात कही गई है। मंदिर का संपर्क मार्ग टूटने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों ने इसकी सूचना तहसील प्रशासन को दे दी है और मंदिर परिसर की सफाई के साथ क्षतिग्रस्त रास्ते को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

मंदिर परिसर में मलबा जमा होने के बाद स्थानीय नवयुवक खुद सफाई अभियान में जुट गए हैं। ग्रामीण लगातार मलबा हटाकर श्रद्धालुओं के लिए रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण सफाई में कई दिन लगने की संभावना है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र में बादल फटने जैसी स्थिति के कारण अचानक भारी मलबा मंदिर परिसर में आया।

हजारों साल पुरानी गुफा में विराजते हैं महादेव

कल्पेश्वर महादेव मंदिर उर्गम घाटी में कल्पगंगा के ऊपरी छोर पर स्थित एक प्राकृतिक गुफा के भीतर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुफा में भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है, जिसकी पूजा उनके जटा स्वरूप के रूप में की जाती है।

पंचकेदारों में शामिल कल्पेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट पूरे साल श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। कठिन मौसम और बर्फबारी के बावजूद यहां देशभर से भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

प्राकृतिक गुफा, ऊंचे पहाड़ों और कल्पगंगा की धारा के बीच स्थित कल्पेश्वर धाम धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है। फिलहाल भारी बारिश से हुए नुकसान के बाद स्थानीय लोग और प्रशासन मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही सामान्य करने की कोशिश में जुटे हैं।

Exit mobile version