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लॉन्च से पहले Duster का पावर शो, 10 लाख किमी की चुनौती पूरी

लॉन्च से पहले नई Duster ने गाड़ा झंडा, पास कर ली 10 लाख किमी की कठिन परीक्षा

भारत में बहुत जल्द नई जनरेशन की रेनॉ डस्टर वापस आ रही है. रेनॉ नई डस्टर (Duster) SUV को 26 जनवरी को लॉन्च करेगी. हालांकि, भारत में आधिकारिक लॉन्च से पहले ही डस्टर ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. नई Duster ने दुनिया भर में 10 लाख किमी की टेस्टिंग पूरी कर ली है. इस दौरान SUV को तीन महाद्वीपों में बेहद मुश्किल हालात में चलाकर देखा गया.

कंपनी के मुताबिक, इस SUV को माइनस 23 डिग्री सेल्सियस की बेहद ठंड से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस की तेज गर्मी तक में टेस्ट किया गया. ये टेस्ट सिर्फ लैब या सीमित जगहों पर नहीं हुए. डस्टर को आम सड़कों, खास टेस्ट ट्रैक्स और मुश्किल इलाकों में चलाया गया, ताकि असल जिंदगी में इसके व्यवहार को समझा जा सके.

भारत में सबसे कठिन परीक्षा

इस टेस्टिंग का सबसे कठिन हिस्सा भारत में हुआ. नई डस्टर (Duster) को लेह-लद्दाख भेजा गया, जहां इसे ऊंचाई वाले इलाकों में टेस्ट किया गया और यह 18,379 फीट ऊंचे खारदुंग ला तक पहुंची. कम ऑक्सीजन, खड़ी चढ़ाई और खराब सड़कों ने इंजन और पूरी गाड़ी की मजबूती की कड़ी परीक्षा ली. इन टेस्ट से इंजीनियरों को परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिली, जो उन भारतीय ग्राहकों के लिए खास है जो शहर से बाहर यात्रा करते हैं. ऊंचाई के अलावा, इस SUV को धूल भरे टनल, पानी से गुजरने वाले रास्तों, बेहद ठंडे मौसम और ज्यादा गर्म इलाकों में भी परखा गया.

कई चुनौतियों से गुजरी SUV

भारत में इसे शहर की सड़कों और सरकारी टेस्ट सेंटर जैसे NATRAX और ARAI में चलाया गया, ताकि टूटी सड़कों, स्पीड ब्रेकर और बार-बार रुकने-चलने वाले ट्रैफिक जैसी रोजमर्रा की चुनौतियों की नकल की जा सके. रेनॉ ने ब्राजील, रोमानिया, फ्रांस, चीन और चेक रिपब्लिक जैसे देशों में भी इसकी ट्यूनिंग और टेस्ट ड्राइव की. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि नई डस्टर अलग-अलग तरह की सड़कों और ड्राइविंग स्टाइल में भी स्थिर और भरोसेमंद महसूस हो.

कंपनियों के लिए एक सामान्य प्रक्रिया

नई डस्टर (Duster) को जिस टेस्ट से गुजारा गया है यह वाहन कंपनियों के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें गाड़ी को अलग-अलग हालात में टेस्ट किया जाता है. इससे यह पक्का होता है कि गाड़ी सिर्फ एक बाजार के लिए नहीं, बल्कि कई तरह के मौसम और परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर सके. जैसे भारत में बहुत गर्मी भी पड़ती है और कड़ाके की ठंड भी, इसलिए जरूरी है कि गाड़ी दोनों हालात में एक जैसी परफॉर्मेंस दे.

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