चंद्रयान-2 के बाद इसरो का अगला मिशन सूर्य पर

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नई दिल्ली। चंद्रयान-2 के बाद इसरो का अगला मिशन सूर्य पर होगा। इसका नाम आदित्य-एल1 होगा। सोमवार को न्यूज एजेंसी ने इसरो के हवाले से बताया कि इसे 2020 के मध्य तक लॉन्च करने की योजना है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि सूर्य के सतह के तापमान 6000 कैलविन से कोरोना का तापमान 300 गुना ज्यादा क्यों है। जबकि कोरोना इससे काफी ऊपर है।

  • इस सोलर मिशन का मकसद सूर्य की बाहरी परत का अध्ययन करना है: इसरो
  • इसरो के मुताबिक इस परत को तेजोमंडल भी कहा जाता है, जिसका असर क्लाइमेट चेंज पर भी पड़ता है
  • चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग प्रोजेक्ट में दो महिलाएं रितु के. और भी एम.वनिता शामिल

इसरो ने अपनी वेबसाइट पर इस मिशन से संबंधित जानकारी साझा की है। सूर्य की इस बाहरी परत को तेजोमंडल कहते हैं, जो हजारों किमी तक फैली है।

लॉन्च हुआ चंद्रयान-2

इससे पहले चंद्रयान-2 सोमवार दोपहर 2.43 बजे श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ। प्रक्षेपण के 17 मिनट बाद ही यान सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया। इसे भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-III रॉकेट से लॉन्च किया गया। इस रॉकेट में तीन मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) हैं। इस मिशन के तहत इसरो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर को उतारेगा।

आदित्य-एल1 तेजोमंडल का विश्लेषण देगा

के.सिवन (इसरो) ने कहा- आदित्य-एल1 पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी की दूरी पर स्थित होगा। वहां से यह हमेशा सूर्य की ओर देखेगा। सूर्य की इस बाहरी परत ‘तेजोमंडल’ का विश्लेषण देगा। इसका क्लाइमेट चेंज पर इसका खासा प्रभाव है।

आदित्य-एल1 कई अध्ययन कर सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक- आदित्य-एल1, सूर्य के फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और तेजोमंडल का अध्ययन कर सकता है। यह सूर्य से निकलने वाले विस्फोटक कणों का अध्ययन भी किया जाएगा। इसरो के अनुसार यह कण पृथ्वी के नीचे वाले ऑरबिट में किसी काम के नहीं होते। इन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर रखने की जरूरत है।

चंद्रयान-2 के लॉन्च में दो महिला वैज्ञानिकों ने बटोरी सुर्खियां

चंद्रयान-2 मिशन सोमवार को दो महिला वैज्ञानिकों ने संभाला। यह रितु कारिढाल और एम.वनिता के लिए खास था। यह दोनों प्रोजेक्ट की निदेशक थीं। इसरो के चैयरमेन के.सिवन ने कहा- हम हमेशा यह सुनिश्चित करते हैं कि महिला वैज्ञानिक भी पुरुषों के समान हों। हमें लगा कि यह दोनों महिलाएं यह करने में सक्षम है। यही कारण है कि उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। दोनों महिला वैज्ञानिक बीते दो दशकों से इसरो के साथ काम कर रही हैं।

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