उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल कार्यालय में एसी का हवा खाओ और पुरस्कार पाओ

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लखनऊ। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में बीते 12 को अप्रैल को मंडल रेल प्रबंधक ने लखनऊ मंडल में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कुछ कर्मचारियों को 64 वां वार्षिक रेल सप्ताह पुरस्कार दिया गया। जिसमें कुछ ऐसे भी कर्मचारी पुरस्कार प्राप्त करने में सफल हुए जो अपना मूल कार्य न करके राहुल दूबे में कार्यालय में काम करते हैं । ये वरिष्ठ मंडल अभियंता समन्वय लखनऊ के कार्यालय में ड्यूटी करते हैं और एस एस ई/पीवे/2 लखनऊ में एलाइनर के पद पर हैं। इनकी पहुंच इतनी ऊपर तक है कि डीआरएम लखनऊ का सख्त आदेश होने के बावजूद भी ये अपना एलाइनर का वर्दी नहीं पहने थे और इसके बावजूद डीआरएम को इनको पुरस्कार देना पड़ा।

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पुरस्कार वितरण में धांधली उजागर होने के बावजूद ट्रेड यूनियन ने साधी चुप्पी

जानकारी के मुताबिक हैरान करने वाली बात ये है की इस प्रकार की धांधली होने का मामला प्रकाश में आने के बावजूद भी कोई ट्रेड यूनियन इसका विरोध तक नहीं करती। जिससे दोनों यूनियनों की मिलीभगत भी सामने आ रही हैं। कड़ी धूप में ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारी को चार्जसीट और कार्यालय में एसी की हवा खाने वालों को पुरस्कार दिये जाने से कर्मचारियों में काफी रोष है और आगामी मान्यता चुनाव में दोनों मान्यता प्राप्त यूनियनों को सबक सिखाने की ठान ली है।

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कनिष्ठ अभियंता भर्ती में इनका चयन करने के लिए डीआरएम पुरस्कार दिया गया

सूत्रों से मिली खबर के अनुसार 20 फीसदी एलडीसीई कोटे के तहत इंजीनियरिंग विभाग में होने वाले कनिष्ठ अभियंता की भर्ती मे इनका चयन करने के लिए इन्हें डी आर एम पुरस्कार दिया गया है? क्यूंकि विभागीय भर्ती में डीआरएम पुरस्कार का भी नम्बर जोड़ा जाता है? इतना ही नहीं इससे पहले भी रुपेश यादव को पुरस्कार दिया गया है जबकि वह ट्रैकमेन्टेनर प्रशिक्षण स्कूल लखनऊ में ड्यूटी करते हैं और इनका पद ट्रैकमैन है।

लखनऊ मंडल प्रशासन बना यूनियन के हाथों की कठपुतली,कनिष्ठ अभियंता भर्ती में धांधली की आशंका

आपको बता दें हद तो तब हुई थी जब रंजन सिंह को पुरस्कार दिया गया था जो कीमैन के पद पर है। ये इतना अच्छा काम करते हैं कि कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया में एक वीडियो प्रकाश में आई थी कि इनके इलाके के प्लेटों में काफी संख्या में बोल्ट नहीं था? जब पुरस्कार वितरण में ऐसी धांधली हो रही है तो वर्तमान में चल रही कनिष्ठ अभियंता की भर्ती में धांधली की आशंका और मजबूत हो गई है। इन सभी घटनाओं को देखने से तो यही मालूम पड़ता है कि लखनऊ मंडल प्रशासन पूरी तरह से यूनियन की हाथों की कठपुतली हो गया है।

 

 

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