पाकिस्तान में पेट्रोलियम (Petroleum) उत्पादों की आपूर्ति और भंडार को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर सरकार पर्याप्त स्टॉक (Petroleum Stock) का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि देश में केवल 14 दिनों का स्टॉक बचा है। इस स्थिति ने पाकिस्तान के आम नागरिकों के बीच ईंधन की किल्लत को लेकर डर पैदा कर दिया है।
विवाद की मुख्य वजह: आंकड़ों का खेल
डीलर्स एसोसिएशन का दावा: पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) के चेयरमैन अब्दुल सामी खान ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) के आंकड़ों को गलत बताया है। उनका कहना है कि भंडार बेहद कम है और अगर आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो देशभर के पेट्रोल पंप बंद करने पड़ सकते हैं।
OGRA का पक्ष: दूसरी ओर, नियामक संस्था OGRA ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और ‘पैनिक बाइंग’ (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) न करें। प्रशासन का दावा है कि भंडार पर्याप्त है।
संकट गहराने के तीन बड़े कारण
ईरान से पेट्रोल और डीजल के आयात पर लगी पाबंदियों ने स्थानीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर बोझ बढ़ा दिया है। पेट्रोलियम (Petroleum) वितरण के लिए लागू नई कोटा प्रणाली की वजह से सप्लाई चेन में बाधा आ रही है।
ऑयल मार्केटिंग एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (OMAP) का आरोप है कि स्थानीय रिफाइनरियों ने तय मात्रा के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता पूरी नहीं की, जिससे कंपनियों के पास वैकल्पिक इंतजाम करने का समय नहीं बचा।
सुरक्षा की मांग और संभावित किल्लत
ईंधन संकट के डर से पेट्रोल पंपों पर भीड़ उमड़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए डीलरों ने सिंध के पुलिस महानिरीक्षक (IG) से सुरक्षा की मांग की है। ओएमएपी के चेयरमैन तारिक वजीर अली के अनुसार, वर्तमान में वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
