IMF से राहत पैकेज के लिए चीन से लिए कर्ज़ की डीटेल बताने को तैयार पाकिस्तान

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नई दिल्ली। चीन ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को चीन-पाकिस्तान के आर्थिक गलियारे की (सीपीईसी या सीपेक) परियोजनाओं में उसके निवेश का बिना भेदभाव और पेशेवर तरीके से मूल्यांकन करना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान को कोई भी वित्तीय पैकेज देते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उससे दोनों देशों के बीच के संबंधों पर असर न पड़े।

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चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि नकदी संकट (विदेशी पूंजी भंडार) से जूझ रहे पाकिस्तान ने सहायता पैकेज के लिये IMF से संपर्क किया है। ऐसे में पाकिस्तान इस परियोजना में चीन से लिए जा रहे कर्ज का ब्योरा देने के लिए भी राजी है। संभवत: इस बात से चीन चिंतित है।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने रविवार को मीडिया से कहा कि हम चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) से संबंधित कर्ज का ब्योरा IMF को देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से मुद्राकोष से राहत पैकेज की मांग की है।

इंडोनेशिया से लौटने के बाद उमर ने कहा कि मित्र देशों से विचार-विमर्श के बाद मुद्राकोष से संपर्क करने का निर्णय किया गया था। उन्होंने इंडोनेशिया में ही IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड से पाकिस्तान को सहायता पैकेज का आग्रह किया था।

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पाकिस्तान के IMF से संपर्क करने के बारे में अपनी प्रतिक्रिया में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने यहां कहा की, ‘‘चीन चाहता है कि IMF पाकिस्तान को दिये गये कर्ज का आकलन तटस्थ और पेशेवर तरीके से ही करे और जो भी पहल की जाए, उससे दोनों मित्र देशों के संबंध बिलकुल भी प्रभावित न हो।

प्रवक्ता ने एक सवाल के जवाब में कहा की, ‘‘चीन, IMF का सदस्य होने के नाते संगठन के पाकिस्तान के साथ सहयोग का समर्थन करता है। हम चाहते हैं कि वो पाकिस्तान में जमीनी स्थिति का तटस्थ और पेशेवर तरीके से आकलन किया जाए।’’

इसी के साथ उन्होंने कहा की, ‘‘हम मौजूदा स्थिति से निपटने को लेकर पाकिस्तान की मदद के लिये IMF का समर्थन कर रहे हैं। उनके उपायों से चीन और पाकिस्तान के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों पर असर नहीं पड़ेगा।’’ उमर के मुताबिक कार्यक्रम पर चर्चा के लिये IMF का दल सात नवंबर को पाकिस्तान आएगा।

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