पंचक (Panchak) पांच दिनों की एक अशुभ अवधि मानी जाती है। इसमें हर तरह के मांगलिक और शुभ कार्य करने की मनाही होती है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि पंचक का संबंध चंद्रमा के गोचर से है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा जब धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो पंचक लगता है।
इस माह में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है, लेकिन उससे पहले पंचक की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि मार्च के महीने में पंचक कब लगेगा। साथ ही जानते हैं कि पंचक के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?
पंचक (Panchak) कब से हो रहे हैं शुरू?
पंचांग के अनुसार 16 मार्च को शाम 06 बजकर 14 मिनट पर पंचक की शुरुआत होने वाली है। इस दिन सोमवार है। वहीं, इसका समापन 20 मार्च को देर रात 02 बजकर 28 मिनट पर होगा। यह पंचक सोमवार को लग रहा है, इसलिए यह राज पंचक कहलाएगा। शास्त्रों में राज पंचक को शुभ माना गया है, लेकिन इस दौरान भी मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं।
पंचक (Panchak) के दौरान कौन से काम नहीं हैं शुभ
निर्माण कार्य: पंचक के दौरान नया निर्माण कार्य शुरू करना या घर की छत ढलवाना शुभ नहीं होता है।
दक्षिण दिशा की यात्रा: इस समय दक्षिण दिशा की यात्रा न करने की सलाह पंडित और ज्योतिषविद देते हैं। क्योंकि दक्षिण मृत्यु के देवता यमराज की दिशा है।
लकड़ी जमा करना: पंचक के दिनों में लकड़ी जमा करने यानी लकड़ी का संचय करने और घास, फूस या सूखी सामग्री एकत्र करने से बचने के लिए कहा जाता है।
नई चारपाई, पलंग या बेड बनवाना: इस दौरान नई चारपाई, पलंग या बेड बनवाना अशुभ माना जाता है।
शुभ और कीमती वस्तुओं खरीदारी: पंचक काल में शुभ और कीमती वस्तुओं खरीदारी से बचने के लिए कहा जाता है।
शादी, सगाई: गृह प्रवेश, शादी, सगाई, मुंडन, नामकरण आदि भी पंचक में नहीं किए जाते हैं।









