मोदी मीडिया खामोश है क्योंकि पेट्रोल के दाम बढ़े नहीं घटे हैं……

पेट्रोल और डीजल
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लखनऊ। पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। वहीं सरकार के हितैषी कुछ मीडिया की ख़ामोशी को देखें तो ऐसा लगता है कि पेट्रोल दाम बढ़ नहीं रहे बल्कि घट रहे हैं। वहीं अगर सरकार द्वारा दाम के रूपए घट जाते हैं तो यही मीडिया ग्रुप उन्हें टॉप न्यूज़ पर रखते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह कि यह वही लोग हैं जो आज से चार साल पहले पेट्रोल के दाम 50 के आंकड़े पर पहुंचते ही सड़क पर उतर आते थे। इन नेताओं को चार साल पहले के अपने बयानों को उठाकर पढ़ने की जरुरत है।

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पेट्रोल और डीजल के अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अभी भी कम

इसमें सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमत 2013-14 के साल जितनी अभी उछली भी नहीं है। लेकिन देश में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर हैं। मोदी सरकार के मंत्रियों को तो ये नारा याद ही होगा ‘बहुत हुई जनता पर डीजल-पेट्रोल की मार, अबकी बार भाजपा सरकार। उस समय पोस्टरों के माध्यम से कांग्रेस पर हमला बोलने वाली बीजेपी सरकार के मुंह पर ताले पड़े हुए हैं। उस वक्त जनता का गुस्सा सांतवें आसमान पर था। लेकिन अब लगता है कि किसी को कोई दिक्कत नहीं जो हो रहा है सही हो रहा है।

कर्नाटक चुनाव के दौरान नहीं बढ़े पेट्रोल के दाम

वर्तमान समय में केंद्र की सत्ता में काबिज बीजेपी के नेता और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के पीछे वही वजह बता रहे हैं जो एक समय सत्ता में रहते कांग्रेस के नेता बताया करते थे लेकिन इसमें भी एक ट्विस्ट है। इससे पहले कर्नाटक चुनाव के कारण 19 दिन तक सरकार दाम नहीं बढ़ने देती है। बल्कि तब भी तो यही अंतर्राष्ट्रीय कारण थे। उसी दौरान तो अमेरिका ईरान के साथ हुए परमाणु करार से अलग हुआ था। 19 दिन बीत गए तो अब दामों पर सरकार का नहीं, बाज़ार का बस हो गया है।

बता दें कि एक सप्ताह में पेट्रोल के दाम में 1.62 रुपये की वृद्धि हो चुकी है। वहीं डीजल के दाम 1.64 रुपये प्रति लीटर बढ़े हैं। कहा ये भी जा रहा है कि दाम अभी और बढ़ेंगे। दूसरी तरफ मंत्री जी का कहना हैं कि जल्दी ही समाधान लेकर हाज़िर होंगे. अभी तक वो समाधान क्यों नहीं तैयार हुआ?

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मोदी मीडिया खामोश है और रहेगा

गौरतलब है कि यूपीए की सरकार के दौरान दिल्ली में 14 सितंबर 2013 को एक लीटर पेट्रोल 76.06 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। तब मीडिया हाउसों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। लेकिन अब ये ख़ामोशी क्यों? 20 मई 2018 को 76.24 रुपये प्रति लीटर हो गया है। अपने सबसे महंगे स्तर पर है। लेकिन दिल्ली का मीडिया चुप है। बोलेगा तो गोदी से उतार कर सड़क पर फेंक दिया जाएगा। मुंबई में एक लीटर पेट्रोल 84.07 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पटना में 81.73 रुपये प्रति लीटर, भोपाल में 81.83 रुपये प्रति लीटर दाम है।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि पेट्रोल पर भी जीएसटी लगा देना चाहिए ताकि उसके दाम स्थिर रहे ऐसा वो इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मलेशिया के नए पीएम ने कहा है कि हफ्ते-हफ्ते का दामों में उतार चढ़ाव अब नहीं होगा। दाम को फिक्स किया जाएगा और ज़रूरत पड़ी तो सरकार सब्सिडी देगी। इसी मलेशिया का उदाहरण देकर भारत में कई लोग जीएसटी का स्वागत कर रहे थे। लेकिन मलेशिया ने तीन साल तक जीएसटी लगाकर हटा दिया है।

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वहीं देश में हफ्ते-हफ्ते दाम बढ़ने की व्यवस्था की गई है। मगर सरकार चुनाव के हिसाब से चाहती है तो दाम नहीं बढ़ते हैं। मोदी सरकार के मंत्री बार-बार कहते रहे हैं कि बैंकों का एनपीए यूपीए की देन है। बात सही भी है। मगर कहा इस तरह से गया जैसे मोदी सरकार के दौरान कुछ हुआ ही नहीं और वह निर्दोष ही रही।

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