पेट्रोल की कीमतों में गिरावट जारी, 71 रुपये से नीचे पहुंचा भाव

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इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये के मजबूत होने से घरेलू बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट जारी है. पेट्रोल और डीजल के दामों में बुधवार को सुस्ती रहने के बाद गुरुवार और शुक्रवार को कीमतों में फिर से गिरावट देखी गई. दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत में 40 पैसे और डीजल में 41 पैसे की कटौती की गई. इसके साथ ही दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल 70.92 रुपये प्रति लीटर और डीजल 65.55 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया. इस तरह पेट्रोल शुक्रवार को 71 रुपये से भी नीचे पहुंच गया.

पेट्रोल में 40 पैसे की कटौती

मुंबई में शुक्रवार को पेट्रोल 40 पैसे सस्ता होकर 76.50 प्रति लीटर और डीजल 68.59 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बिक रहा है. इसके अलावा चेन्नई और कोलकाता में शुक्रवार को पेट्रोल के रेट क्रमश: 73.57 रुपये और 72.97 हो गए. वहीं इन दोनों ही शहरों में डीजल क्रमश: 69.19 और 67.28 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. वहीं अगर उत्तर प्रदेश के नोएडा की बात करें तो यहां पर पेट्रोल 21 पैसे सस्ता होकर 70.82 रुपये और डीजल 25 पैसे की कटौती के बाद 64.89 रुपये के स्तर पर पहुंच गया.

ब्रेंट क्रूड में लगातार गिरावट

आपको बता दें कि इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है और ये 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे 59.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं. एक समय ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था. अक्टूबर से अब तक ब्रेंट क्रूड में 30 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है. दूसरी तरफ तेल निर्यातक देशों का संगठन ओपेक कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के लिए शुक्रवार को रूस समेत 10 साझेदार देशों के साथ बैठक करेगा.

तेल उत्पादन में कटौती पर सहमति नहीं

संगठन की गुरुवार को हुई मीटिंग में तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए कटौती के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी. हालांकि, यह समझौता नहीं हो सका. सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद अल-फलीह ने वियना में ओपेक की बैठक के बाद मीडिया से कहा, ‘नहीं, मैं तेल उत्पादन में कटौती को लेकर समझौते पर आश्वस्त नहीं हूं.’ रूस के ऊर्जा मंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने सेंट पीटर्सबर्ग में गुरुवार को को कहा, ‘हमारी जलवायु परिस्थितियों के चलते अन्य देशों की तुलना में हमारे लिये कटौती करना ज्यादा मुश्किल है.’

इस बीच, सऊदी अरब को अमेरिका की ओर से मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्वीट कर ओपेक देशों से कच्चे तेल की कीमतें नहीं बढ़ाने की मांग की थी. अल-फलीह ने जोर देकर कहा कि हमें कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के लिये किसी की इजाजत की जरुरत नहीं है. वहीं, सऊदी अरब के प्रतिद्वंद्वी और ओपेक के तीसरे सबसे बड़ा उत्पादक देश ईरान ने उत्पादन में भारी कटौती का पक्ष लिया है.

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