कर्नाटक में नहीं थम रहा राजनीतिक घमासान, सिद्धरमैया की चिट्ठी से फिर तनातनी

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नई दिल्ली। पांच जुलाई को राज्य का बजट पास होने के बाद एक बार फिर कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कर्नाटक में जब से कांग्रेस व जेडीएस की गठबंधन सरकार बनी है तब्स तब से दोनों के बीच चल रही सियासी मनमुटाव ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा। एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है यहां नई सरकार का गठन हुए, लेकिन सियासी तकरार लगातार जारी है।

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सिद्धरमैया ने चावल के दाम बढ़ाने पर जताई आपत्ति

इस बार कर्नाटक में मचे इस राजनीतिक तनातनी की वजह सिद्धरमैया की एक चिट्ठी है। दरअसल, मौजूदा विवाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के उस बजट प्रस्ताव पर है, जिसमें कहा गया है कि अन्न भाग्य स्कीम के तहत गरीबों के लिए प्रति किलो चावल पर 1 रुपए दाम कम करके पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए जाएं। इस बाबत सिद्धारमैया ने कुमारस्वामी को एक चिट्ठी लिखी है।

अन्न भाग्य योजना से लाभान्वित होते हैं 3 करोड़ लोग

सिद्धारमैया ने कुमारस्वामी को लिखी चिट्ठी में कहा है कि सीएम को 34,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफी के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए चावल की मात्रा प्रति व्यक्ति 7 किलो से 5 किलो नहीं करनी चाहिए, इससे जनता के बीच सरकार की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि सिद्धारमैया अपनी सरकार की योजना अन्न भाग्य पर काफी गर्व करते हैं, जिसमें राज्य के 3 करोड़ लोगों को लाभ हुआ।

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अन्न की कटौती पर भी जताई नाखुशी

जानकारी के मुताबिक, सिद्धारमैया इस योजना में मौजूदा सरकार की ओर से की जा रही कटौती से नाखुशी जाहिर की। अपनी चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि चावल की 2 किलो मात्रा कम कर देने से हर वर्ष 600-700 करोड़ रुपये ही बचेंगे। उन्होंने कुमारस्वामी को सलाह दी है कि वह पेट्रोल और डीजल पर सरकार लेवी ना बढ़ाए, जिससे इनके दाम बढ़ सकते हैं। इस खत के जरिए दोनों ही पार्टियों के बीच चल रहा भतभेद अब खुलकर सामने आ गया।

मौका भुनाने में जुटी बीजेपी

इधर, जेडीएस और कांग्रेस के बीच शुरू हुए सियासी घमासान को भाजपा भुनाने में जुट गई है, और बीजेपी उम्मीद जता रही है कि कर्नाटक में कुमार स्वामी सरकार शायद ही अपने पांच साल पूरे कर पाये। कर्नाटक के भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि सिद्धारमैया की चिट्ठी ने जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के बीच गहरे अलगाव को सामने ला दिया है।

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पहले भी हो चुका है मतभेद

राजनातिक सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद के बाद एक बार फिर भाजपा यहां सक्रिय हो गई है और मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, जेडीएस की ओर इस खत का जवाब अभी तक नहीं दिया गया है। आपको बता दें कि इसके पहले भी दोनों के बीच बजट पेश करने को लेकर मतभेद हो चुका है और राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। तब जाकर सीएम कुमार स्वामी अपना बजट पेश कर पाए थे।

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