बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी को मिली करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक और प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपना आशियाना बदल दिया है। बिहार में एनडीए (NDA) सरकार के 6 महीने पूरे होने के अवसर पर प्रशांत किशोर ने खुलासा किया कि वे पटना स्थित अपने पिछले हाई-प्रोफाइल आवास को छोड़कर शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक आश्रम में शिफ्ट हो गए हैं। दरभंगा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान 48 वर्षीय प्रशांत किशोर ने बताया कि वे मंगलवार रात को ही पटना के एयरपोर्ट के पास स्थित अपने पिछले ठिकाने से बाहर निकल आए और अब वे वहीं से अपनी आगे की राजनीतिक गतिविधियां संचालित करेंगे।
प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपने नए ठिकाने की जानकारी देते हुए बताया कि अब आईआईटी (IIT) पटना के पास स्थित ‘बिहार नवनिर्माण आश्रम’ ही उनका नया स्थायी पता होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस आश्रम में तब तक निवास करेंगे, जब तक कि बिहार में अगले विधानसभा चुनाव नहीं हो जाते। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अगले चुनावों तक जन सुराज पार्टी राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी होगी। इससे पहले, आई-पैक (I-PAC) के सह-संस्थापक रहे प्रशांत किशोर पटना एयरपोर्ट के पास स्थित एक विशाल बंगले ‘शेखपुरा हाउस’ से अपनी पार्टी का कामकाज संभाल रहे थे। यह बंगला जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व सांसद उदय सिंह (पप्पू सिंह) के परिवार की निजी संपत्ति है, जो 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह के छोटे भाई हैं।
इस दौरान जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बेहद तीखा और व्यक्तिगत हमला बोला। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने पिछले महीने ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख किया है। पीके ने तंज कसते हुए कहा कि चुनावों के बाद जो व्यक्ति बिहार का मुख्यमंत्री चुना गया, वह राज्य के युवाओं का आर्थिक पलायन रोकने में तो पूरी तरह नाकाम रहा, लेकिन उसने खुद राजनीति से पलायन करने का रास्ता चुन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने खुद हटने से पहले यह पूरी तरह सुनिश्चित कर लिया कि उनके बेटे को बिहार की सत्ता में जगह मिल जाए। प्रशांत किशोर का इशारा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की ओर था, जो वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में शामिल हो चुके हैं।
प्रशांत किशोर ने बिहार के मतदाताओं से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि वे जाति, धर्म या पैसों के लालच में आकर वोट देने की बजाय अपने बच्चों के भविष्य और हितों को प्राथमिकता दें। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार या लालू प्रसाद यादव जैसे कद्दावर नेताओं के बहकावे में आने से बचना चाहिए। चुनावों से ठीक पहले शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना’ (जिसके तहत 1.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10-10 हजार रुपये बांटे गए थे) पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को महज 10,000 रुपये के प्रलोभन में आकर अपना बहुमूल्य वोट नहीं बेचना चाहिए।
इसके साथ ही, उन्होंने बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सरकारी धन के दुरुपयोग और फिजूलखर्ची का गंभीर आरोप लगाया। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार आज भी देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक है, लेकिन इसके बावजूद यहां के मुख्यमंत्री 25 एकड़ के विशाल सरकारी आवास में ठाट-बाट से रहते हैं, जिसके बगीचों के रखरखाव पर ही करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं। उन्होंने प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चाओं का हवाला देते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री इस परिसर को और बड़ा करने की योजना बना रहे हैं, जिसके तहत वे उस बंगले को भी मुख्यमंत्री आवास में मिलाने जा रहे हैं जिसमें वे पहले उपमुख्यमंत्री के तौर पर रहा करते थे।
