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दिल्ली विश्वविद्यालय में ओपन बुक परीक्षा को लेकर विरोध जारी

नई दिल्ली| दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक संगठन व छात्रों का स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों की ओपन बुक परीक्षा स्थगित होने के बाद इसे रद करने की मांग तेज हो गई है। छात्रों व शिक्षकों ने डीयू द्वारा ओपन बुक परीक्षा कराने का विरोध किया है। छात्रों का भी इस ओपन बुक परीक्षा को लेकर गुस्सा निकला है और छात्रों ने सोशल मीडिया पर इसका मीम्स बनाकर अपना प्रतिरोध जताया है। किसी ने राजपाल यादव की फोटो लगाकर यह लिखा है कि अब कुछ नहीं हो सकता क्या?

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इसी तरह सनी देओल की फोटो लगाकर एक छात्र ने लिखा है कि तारीख पर तारीख पर तारीख पर तारीख मिलता लेकिन ओपन बुक कैंसल नहीं होता । डीयू शिक्षक संगठन के अध्यक्ष राजीब रे मानव संसाधन विकास मंत्री, यूजीसी चेयरमैन व डीयू के कुलपति प्रो.योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर छात्रों की समस्या से अवगत कराते हुए इस परीक्षा को रद करने की मांग की है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि कोविड-19 से उपजी स्थिति के कारण ओपन बुक परीक्षा 10 दिन के लिए स्थगित की गई है जबकि 10दिन बाद भी कोविड को लेकर स्थिति बहुत ठीक नहीं होने की संभावना नहीं है।  डूटा के सर्वे में 85 फीसद छात्रों ने इसे नकारा है। छात्रों की मन:स्थिति ओपन बुक परीक्षा देने की नहीं है।

कांग्रेस के शिक्षक संगठन भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक कांग्रेस के संयोजक पंकज गर्ग का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ओपन बुक परीक्षा का मजाक बना दिया है। कोविड-19 पर स्थिति अगले दस दिनों में सुधरने वाली नहीं लग रही है और यह आने वाले दिनों में और खराब हो जाएगी। ओपन बुक टेस्ट परीक्षा के निर्णय से दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों में भ्रम और अधिक तनाव का माहौल पैदा होगा।

कॉमन सर्विस सेंटर, जिनमें वे बार-बार बात कर रहे हैं, उनके पास कोई उचित बुनियादी ढांचा नहीं है और उनमें से अधिकांश वर्तमान कोविड-19की स्थिति में काम नहीं कर रहे हैं। 50 फीसद से अधिक बाहरी छात्रों सहित छात्रों के लिए समस्याएं समान बनी रहेंगी। यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग(यूजीसी) को तुरंत इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा को रद्द करने के दिशानिर्देशों को भेजना चाहिए और अंतिम वर्ष के छात्रों का मूल्यांकन पिछले प्रदर्शन के आधार किया जाना चाहिए।

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शिक्षक संघ एकेडमिक फार एक्शन एंड डेवलेपमेंट के पदाधिकारी व डीयू में कार्यकारी परिषद के सदस्य डा.राजेश झा का कहना है कि डीयू के छात्र वर्तमान परिस्थिति में परीक्षा देने की स्थिति में नहीं है। वह मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और लगातार उनके फोन व मेल आ रहे हैं। परीक्षा रद न करके उसकी तिथि 10 दिन अधिक बढ़ा देना डीयू की छात्रों के प्रति उदासीनता और निर्दयता को दर्शाता है।

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