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ये उपदेश नहीं नाकामी के सबूत हैं… PM मोदी की अपील पर राहुल गांधी का हमला

PM Modi-Rahul Gandhi

PM Modi-Rahul Gandhi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मध्य पूर्व और खाड़ी संकट के बीच तेल, गैस और सोने के उपयोग में संयम बरतने की अपील पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस अपील को केंद्र सरकार की विफलता का प्रतीक बताया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पिछले 12 वर्षों से देश पर शासन कर रहे हैं, लेकिन आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि सरकार को जनता को यह बताना पड़ रहा है कि उन्हें क्या खरीदना चाहिए और कहां जाना चाहिए।

उन्होंने (Rahul Gandhi) प्रधानमंत्री के इस संबोधन को उपदेश के बजाय उनकी शासन संबंधी नाकामियों का बड़ा सबूत करार दिया। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर बार जिम्मेदारी जनता पर डालना जवाबदेही से बचने का एक तरीका है और अब देश चलाना इस सरकार के बस की बात नहीं रह गई है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैश्विक परिस्थितियों और एनर्जी सेक्टर पर बढ़ते दबाव का हवाला देकर जनता से सहयोग मांगा था। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन की कीमतों पर असर पड़ रहा है, इसलिए पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करें। उन्होंने सुझाव दिया कि निजी वाहनों के बजाय मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जाए और माल ढुलाई के लिए रेलवे को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही, विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के उद्देश्य से उन्होंने देशवासियों से अगले एक साल तक सोने की खरीद को टालने और वर्क फ्रॉम होम व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को पुनः अपनाने की अपील की थी।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल है। सरकार का तर्क है कि नागरिकों द्वारा बरता गया संयम देश को आर्थिक संकट से बचाने में मदद करेगा, जबकि विपक्ष इसे महंगाई और आर्थिक कुप्रबंधन को छिपाने की कोशिश मान रहा है।

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने तंज कसते हुए कहा कि जनता से लगातार ‘त्याग’ की मांग करना सरकार की अक्षमता को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गहरा सकता है क्योंकि ईंधन और सोने जैसी बुनियादी चीजों पर सरकारी अपील का असर सीधे तौर पर आम जनता के निवेश और दैनिक जीवन पर पड़ेगा। फिलहाल, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस जुबानी जंग ने देश में एक नई आर्थिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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