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राजेश कुमार बने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट, रचा इतिहास

Rajesh Kumar becomes loco pilot of hydrogen train

Rajesh Kumar becomes loco pilot of hydrogen train

चंडीगढ़। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) के संचालन के साथ ही भारतीय रेलवे ने एक नया इतिहास रच दिया है। हरियाणा के जींद से शुरू हुई इस अत्याधुनिक ट्रेन को पहली बार पटरी पर दौड़ाने का गौरव लोको पायलट राजेश कुमार (Rajesh Kumar) और सहायक लोको पायलट गगनदीप सिंह को मिला। कई महीनों की विशेष तकनीकी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद दोनों रेल कर्मचारियों ने आज इस ऐतिहासिक ट्रेन की कमान संभाली। सफर के बाद कर्मचारियों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार और गौरवान्वित करने वाला अनुभव बताया।

राजेश कुमार जींद मुख्यालय में तैनात हैं। वह लोको पायलट (पैसेंजर) हैं। उन्हें भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी मिली है। राजेश कुमार ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह नई तकनीक पर आधारित है। इसमें पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में अधिक पावर है। यह साउंड प्रूफ है और इससे पर्यावरण में किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। इसकी पिक-अप भी काफी बेहतर है, जिससे ट्रेन का संचालन अधिक सुगम और प्रभावी होता है।

कुमार ने बताया कि इस ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाया गया है। फ्यूल सेल में करीब 8.5 बार के दबाव से हाइड्रोजन गैस भेजी जाती है, जबकि दूसरी ओर से ऑक्सीजन प्रवेश करती है। दोनों के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली, जलवाष्प (भाप) और पानी उत्पन्न होते हैं। बिजली ट्रेन को चलाने का काम करती है, जलवाष्प वातावरण में निकल जाती है और पानी नीचे निकल जाता है।

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के सफल संचालन में जींद मुख्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट गगनदीप सिंह की भूमिका अहम है। उन्हें भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। शुक्रवार को जींद पहुंचे रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव तथा अन्य वीवीआईपी को गगनदीप सिंह ने ही ट्रेन के संचालन के बारे में पूरी जानकारी प्रदान की।

गगनदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने चेन्नई से आए विशेषज्ञों ने इसकी पूरी तकनीक और संचालन प्रक्रिया की जानकारी दी। यह करीब 3200 हॉर्सपावर की अत्याधुनिक ट्रेन है। इसमें आठ ट्रैवल (यात्री) कोच और दो पावर कार हैं। एक पावर कार आगे और दूसरी पीछे लगी है, जिससे ट्रेन को आवश्यक शक्ति मिलती है।

इस ट्रेन में आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं। आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा करीब 26 सेंसर लगाए गए हैं, जो गर्मी, आग और हाइड्रोजन गैस के रिसाव का तुरंत पता लगा लेते हैं। सुरक्षा के मामले में यह ट्रेन बेहद उन्नत और विश्वस्तरीय है। गगनदीप सिंह ने बताया कि यह उनके लिए बेहद गर्व और खुशी का क्षण है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हिस्सा बनना अपने आप में एक अलग अनुभव है।

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