राज्यसभा: विपक्ष को खुश कर रहे हैं हरिवंश, पहले ही दिन सरकार की हो गयी बेइज्जती

हरिवंश

नई दिल्ली। राज्यसभा के नवनिर्वाचित उपसभापति हरिवंश अपने कार्यकाल के पहले ही दिन ही विपक्ष के समर्थन में दिखे वहीं सरकार को बेइज्जती का घूंट पीकर रहना पड़ा। दरअसल शुक्रवार को राज्यसभा में कार्रवाई के दौरान उपसभापति ने एक सदस्य के निजी प्रस्ताव पर वोटिंग करवाकर सरकार की फजीहत करा दी। बल्कि सरकार की तरफ से इसके विरोध में तर्क दिया गया कि इस तरह से एक सदस्य के निजी प्रस्ताव पर वोटिंग करने से नई परंपरा शुरू हो जाएगी। ये नियम के विरुद्ध है। वहीं उपसभापति ने इस दलील को खारिज कर दिया।

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हरिवंश ने निजी प्रस्ताव के लिए वोटिंग को दी मंजूरी

शुक्रवार को एक निजी सदस्य के प्रस्ताव में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों के आरक्षण को किसी भी राज्य में अस्वीकार नहीं करने की बात सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 में संशोधन की मांग की गई थी। जिसमें कहा गया था कि इन जातियों के लोग जब रोजगार की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं और वहां स्थाई रूप से बस जाते हैं तो उन्हें आरक्षण के लाभ के लिए अपात्र समझा जाता है। बता दें कि ये प्रस्ताव सपा के सांसद विश्वंभर प्रसाद निषाद द्वारा लाया गया था।

वहीं सरकार ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोटिंग करनी पड़ी जिस पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए दलित विरोधी और मनुवादी होने का आरोप लगाया। बता दें कि प्रस्ताव के पक्ष में 32 वोट पड़े, बल्कि विरोध में 66 वोट पड़े। बता दें कि अगर यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो सरकार को अगले ही सत्र में इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए संसद में विधेयक लाना पड़ता।

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उपसभापति हरिवंश ने विपक्षी मांग को माना

इस दौरान विपक्ष ने असाधारण तरीके से मत विभाजन की जिस पर उपसभापति हरिवंश ने प्रस्ताव पर मतविभाजन का आदेश दिया। वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सदन में एक नया दृष्टांत पेश किया जा रहा है। सांसद आमतौर पर निजी सदस्यों के प्रस्तावों पर चर्चा करने और सरकार की ओर से आश्वासन मिलने पर उन्हें वापस ले लेते हैं।

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