सहयोगी दलों ने भी छोड़ा बीजेपी का साथ

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नई दिल्ली। मोदी सरकार के लिए तीन तलाक से सम्बंधित बिल को बिना संशोधन के पास कराना अब बेहद मुश्किल दिखाई पड़ रहा है। इस मामले में बीजेपी के सहयोगी दल भी उसके साथ नहीं हैं। इस बिल को सरकार ने लोकसभा में बहुमत होने के कारण असानी से पास करा लिया था। लेकिन राज्यसभा में इसे पास कराना उतना ही मुश्किल लगने लगा है। सदन में विपक्ष के हंगामे के कारण ये बिल पास नहीं हो सका। लेकिन आज सरकार की यही रणनीति यही रहेगी कि इसे किसी तरह भी पास कराया जा सके।

सूत्रों की माने तो सरकार इस मामले में विपक्ष की मांग मान सकती है क्योंकि उसके पास कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ रहा है कहा जा रहा है कि सरकार इसे सलेक्ट कमेटी भेज सकती है।

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सहयोगी दलों और विपक्ष की बिल को सलेक्ट कमेटी भेजने की मांग

  • इस बिल को पास कराने से पहले बीजेपी के सहयोगी दल और विपक्ष इसे सलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग कर रहे हैं।
  • उनका कहना है कि इस बिल में तमाम खामियां है।
  • इसे पास करने से पहले इसे सलेक्ट कमेटी को भेजा जाए।
  • कहा जा रहा है कि सरकार ने इस बिल सजा का प्रावधान बेहद सख्त रखा है।
  • जोकि मुस्लिम परिवार की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति पर गलत प्रभाव डाल सकता है।

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बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी छोड़ा साथ

  • इस बिल को पास कराने के जज्बोजहत लगी बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी उसका साथ छोड़ दिया है।
  • इस मामले में NDA के सहयोगी दल और विपक्ष इसे सलेक्ट कमेटी भेजने की मांग कर रहे हैं।
  • बीजेपी के सहयोगी दल AIADMK, शिवसेना और टीडीपी तीन तलाक बिल में संशोधन चाहती हैं।
  • साथ ही विधेयक को संसदीय समिति को भेजने वालों में कांग्रेस की तरफ प्रस्तावित सदस्यों के नाम में टीडीपी का नाम है।
  • कांग्रेस, एसपी, टीएमसी, डीएमके, एनसीपी, सीपीआई और सीपीएम सहित अन्य पार्टियों ने भी विपक्षी एकता का साथ दिया।

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क्यों बेबस दिखाई पड़ रही है बीजेपी

  • बता दें कि लोकसभा में इस बिल को पिछले हफ्ते असानी से मंजूरी मिल गयी थी।
  • इसकी मुख्य वजह ये थी लोकसभा में सरकार के पास बहुमत था।
  • लेकिन राज्यसभा में परिस्थितियां बिलकुल उलट है।
  • राज्यसभा में  कूल 238 सदस्य है जिसमें बीजेपी और कांग्रेस के पास 57 सीटें हैं।
  • वहीं, सपा-18, अन्नाद्रमुक-13, तृणमूल-12, बीजद-8, वामदल-8, तेदेपा-6, एनसीपी-5, द्रमुक-4, बसपा-4, राजद के 3 सदस्य हैं।
  • इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दलों के 20 सदस्य हैं।
  • ऐसे में बिल को पास पास कराने के लिए सरकार को कांग्रेस के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी।
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